भागलपुर नगर निगम में 2.40 लाख की अवैध निकासी की पुष्टि, पार्षद रंजीत मंडल की सदस्यता रद्द करने की तैयारी

Hariom Mishra11 March 20262 min read17 viewsCity Local
भागलपुर नगर निगम में 2.40 लाख की अवैध निकासी की पुष्टि, पार्षद रंजीत मंडल की सदस्यता रद्द करने की तैयारी

भागलपुर नगर निगम में भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है। वार्ड नंबर 13 के पार्षद रंजीत मंडल और पूर्व जूनियर इंजीनियर Jyoti Kumar पर मिलीभगत कर सरकारी पैसे की अवैध निकासी का आरोप सही पाया गया है। जिला प्रशासन की जांच में यह साफ हुआ है कि निगम के आंतरिक योजना मद से 2.40 लाख रुपये गलत तरीके से निकाले गए। इस रिपोर्ट के बाद मेयर Dr. Basundhara Lal ने पार्षद की सदस्यता रद्द करने का प्रस्ताव नगर आयुक्त को भेज दिया है।

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कैसे हुआ इस भ्रष्टाचार का खुलासा और जांच में क्या मिला?

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मिर्जाहट रोड के निवासी संजीव कुमार सिंह की शिकायत पर जिलाधिकारी Dr. Naval Kishore Chaudhary ने इस मामले की जांच के आदेश दिए थे। एडिशनल कलेक्टर द्वारा की गई जांच में पाया गया कि पार्षद रंजीत मंडल ने जूनियर इंजीनियर Jyoti Kumar के माध्यम से चार चेक के जरिए कुल 2.40 लाख रुपये प्राप्त किए थे। यह सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता और पद के दुरुपयोग का मामला है। प्रशासन ने इसे गंभीर आचरण दोष माना है क्योंकि एक जन प्रतिनिधि का इस तरह पैसे लेना नियमों के खिलाफ है।

अब आगे क्या कार्रवाई होगी और प्रशासन का क्या स्टैंड है?

प्रशासन ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कई बड़े कदम उठाए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई कार्रवाई की स्थिति इस प्रकार है:

संबंधित व्यक्ति/संस्था कार्रवाई की स्थिति
Ranjit Mandal (पार्षद) सदस्यता रद्द करने का प्रस्ताव नगर विकास विभाग को भेजा गया
Jyoti Kumar (पूर्व JE) अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए नगर आयुक्त को निर्देश
प्रशासनिक फैसला दोनों आरोपियों के स्पष्टीकरण को असंतोषजनक मानकर खारिज किया
नगर निगम बोर्ड मामले पर कानूनी प्रक्रिया चलने के कारण चर्चा पर रोक

पार्षद का धरना और निगम में हुआ भारी हंगामा

इस जांच रिपोर्ट के बीच पार्षद रंजीत मंडल ने मेयर पर ही भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए भूख हड़ताल शुरू कर दी थी। हालांकि प्रशासन के आदेश पर निगम के सुरक्षा गार्डों ने उनके धरने का सामान हटा दिया, जिससे काफी हंगामा हुआ। पार्षद इस पूरी कार्रवाई को एक राजनीतिक साजिश बता रहे हैं। वहीं जिलाधिकारी ने जांच रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेजों को अंतिम फैसले के लिए Urban Development Department को भेज दिया है। नगर निगम की सामान्य बोर्ड बैठक में भी इस मुद्दे पर काफी गहमागहमी रही लेकिन मेयर ने इस पर बहस की अनुमति नहीं दी।

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