सावधान! गंगा में मूर्तियों के अवशेष छोड़ने पर भड़के लोग, नगर निगम की बड़ी लापरवाही आई सामने

भागलपुर नगर निगम मायागंज घाट पर माँ विसारी की मूर्तियों के विसर्जन के दौरान लापरवाही के गंभीर आरोपों का सामना कर रहा है। विसर्जन के बाद चादरें हटाने के बाद गंगा नदी में दर्जनों मूर्तियों के अवशेष छोड़ दिए गए।
- मायागंज घाट पर विसर्जन के बाद मूर्तियों के अवशेष नदी में ही छूट गए।
- नगर निगम ने प्रदूषण रोकने के लिए कृत्रिम तालाब बनाए थे, फिर भी लापरवाही हुई।
- यह घटना सुप्रीम कोर्ट और CPCB के नियमों का सीधा उल्लंघन है।
क्या था नगर निगम का इंतजाम
यह मामला 20 अगस्त 2026 को सामने आया। इससे पहले 19 अगस्त 2026 को 116 माँ विसारी मूर्तियों का विसर्जन शुरू हुआ था। नगर निगम ने जल प्रदूषण रोकने के लिए मुसहरी घाट और रिफ्यूजी कॉलेज के पास टैंक घाट जैसे स्थानों पर कृत्रिम तालाब निर्धारित किए थे। निगम ने इन कृत्रिम स्थलों पर लाइटिंग, साफ-सफाई और अवशेषों को हटाने के लिए टीमें भी तैनात की थीं, लेकिन मायागंज घाट पर अवशेषों के प्रबंधन में विफलता देखी गई।
नियमों का उल्लंघन और जुर्माने का प्रावधान
गंगा नदी में मूर्तियों के अवशेषों को डालना सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के दिशा-निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है। राष्ट्रीय नियमों के अनुसार प्राकृतिक जल निकायों में मूर्तियों का विसर्जन सख्त वर्जित है। नियमों में इको-फ्रेंडली सामग्री, गैर-विषाक्त रंगों के उपयोग और विसर्जन से पहले प्लास्टिक व फूलों जैसी पूजन सामग्री को हटाना अनिवार्य है। इन नियमों के तहत, अनुपालन न करने पर 50,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है, क्योंकि राज्यों को यह सुनिश्चित करना होता है कि सभी विसर्जन गतिविधियां केवल कृत्रिम या अस्थायी निर्धारित स्थलों पर ही हों।