भागलपुर में नगर निगम कर्मियों की हड़ताल से बुरा हाल: जमा हुआ 900 टन कचरा, पानी की किल्लत बढ़ी

भागलपुर नगर निगम कर्मियों की तीन सूत्री मांगों को लेकर जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर अब पूरे शहर में दिखने लगा है। पिछले छह दिनों से सफाई व्यवस्था ठप होने के कारण शहर में करीब 900 मीट्रिक टन कचरा जमा हो गया है। मुख्य सड़कों, मोहल्लों और बाजारों में जगह-जगह कचरे के ढेर लग गए हैं। बारिश और उमस के कारण कचरे से उठ रही बदबू से लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है और कई लोग नाक पर रुमाल रखकर चलने को मजबूर हैं। इससे मच्छरों और संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
कचरा न उठने की वजह से लोग खुद डंपिंग पॉइंट पर कूड़ा फेंक रहे हैं, जिससे वहां अंबार लग गया है। कई लोग खुले स्थानों पर भी कूड़ा फेंक रहे हैं जिससे स्थिति और बिगड़ गई है। भोलानाथ रेलवे अंडरपास में जलभराव है, जबकि इशाकचक और मिरजानहाट मार्ग पर कीचड़ और जलजमाव के बीच लोगों को आना-जाना पड़ रहा है। नगर आयुक्त ने सफाई एजेंसी को अतिरिक्त मजदूर देने का निर्देश दिया था ताकि मुख्य रास्तों की सफाई हो सके, लेकिन एजेंसी पर्याप्त मजदूर उपलब्ध नहीं करा सकी।
हड़ताल का असर शहर की पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ा है। बरारी वाटर वर्क्स से मानसिक सरकार क्षेत्र में जलापूर्ति बाधित रही और भंडारण की समस्या से संचालन प्रभावित हुआ। पिछले 20 दिनों से वाटर खराब होने के कारण 32 वार्ड की कॉलोनियों में डीप बोरिंग आधारित जलापूर्ति बंद है। इससे हटिया रोड और नवाबबाग कॉलोनी समेत आसपास के इलाकों में पानी नहीं पहुंच रहा है।
इसके अलावा, वार्ड 34 के भीखनपुर भट्टा मार्ग, वार्ड 51 के महादेव तालाब और वार्ड 43 के प्याऊ का मोटर भी खराब है, जिससे लोग पानी के लिए परेशान हैं। नागरिकों ने खराब उपकरणों की तुरंत मरम्मत और वैकल्पिक जलापूर्ति की मांग की है। बरसात के मौसम में गंदगी और जलजमाव की वजह से डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा और अधिक बढ़ गया है।