कला और संस्कृति विभाग ने भागलपुर प्रशासन के साथ मिलकर शुक्रवार को भागलपुर संग्रहालय में 'यूथ एक्सप्रेसियन' यानी युवा अभिव्यक्ति कार्यशालाओं की शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक कलाओं और युवा पीढ़ी के बीच की दूरी को कम करना है। जिला कला और संस्कृति अधिकारी अंकित रंजन ने बताया कि इस कार्यक्रम के पहले चरण में 25 सितंबर से 29 सितंबर तक स्क्रीन प्रिंटिंग कार्यशाला चल रही है।
इस दौरान प्रतिभागियों को स्क्रीन प्रिंटिंग की तकनीक, डिजाइन बनाने, रंग मिलाने और अंतिम प्रिंट तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा।
इसके बाद संग्रहालय 6 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक मंजूषा कला और 12 अक्टूबर से 16 अक्टूबर तक सिक्की कला का प्रशिक्षण देगा। इस कार्यक्रम में बोलते हुए अंकित रंजन ने कला को केवल एक हुनर के बजाय कल्पना, संवेदनशीलता और विचारों को व्यक्त करने का एक सशक्त माध्यम बताया।
उन्होंने प्रशिक्षुओं को बिना किसी झिझक के प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक कलाकार के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनाने के लिए लगातार अभ्यास, जिज्ञासा और रचनात्मक सोच बहुत जरूरी है।
अंकित रंजन ने आगे बताया कि भागलपुर संग्रहालय को केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने वाले केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि युवाओं की रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए एक सक्रिय मंच के रूप में विकसित किया जा रहा है।