भागलपुर और नवगछिया के शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती बड़े उत्साह के साथ मनाई गई, जिसमें उनके साहित्यिक योगदान और देशभक्ति की कविताओं को नमन किया गया।
- टीएमबीयू के हिंदी विभाग, बीएन कॉलेज और खरीक कॉलेज में हुए भव्य आयोजन।
- मूर्तियों पर माल्यार्पण और कवि गोष्ठी के जरिए दी गई श्रद्धांजलि।
- दिनकर की कविताओं से देशप्रेम और राष्ट्रीय चेतना को किया गया याद।
तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग में शिक्षक और छात्र दिनकर परिसर में एकत्र हुए और उनकी प्रतिमा पर
माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। इस कार्यक्रम में विभाग की अध्यक्ष
प्रो. प्रतिभा राजहंस, प्रो. नीलू कुमारी, प्रो. आलोक रंजन और लाल सिंह आारोही शामिल हुए।
पीयूष राज, रोहित, अभिलाषा, कर्मा, स्वीटी, वैष्णवी, जूही, प्रियदर्शनी, दीपा, पायल और बालकृष्णसहित छात्र-छात्राओं और शोधार्थियों ने कविता पाठ में हिस्सा लिया। कार्यक्रम का संचालन
डॉ. दिव्यानंद ने किया और धन्यवाद ज्ञापन शोधार्थी सचिन ने दिया।
बीएन कॉलेज के हिंदी विभाग में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया जहां
प्रो. आरती कुमारी ने दिनकर के पुरुषत्व और स्त्री चेतना पर उनके दोहरे फोकस पर प्रकाश डाला।
डॉ. दिव्या रानी ने चर्चा की कि कैसे उनकी शक्तिशाली कविताओं ने राष्ट्रीय चेतना को जगाया। अन्य वक्ताओं में
विजेंद्र कुमार यादव, डॉ. सुजाता और डॉ. फिरोज आलम शामिल रहे। इस कार्यक्रम में छात्र हर्ष, रवि, साक्षी, मीनाक्षी, सीमा, कोमल, अमर और सीता ने सहयोग किया।
नवगछिया में खरीक के राजकीय डिग्री कॉलेज में
शिक्षणोपयोगी संवाद श्रृंखला-3 का आयोजन किया गया। प्राचार्य
डॉ. जलेशवर सिंह ने बताया कि दिनकर ने अपनी साहित्यिक रचनाओं के जरिए जातिगत असमानता का विरोध किया और स्वतंत्रता आंदोलन को प्रेरित किया। हिंदी के प्रोफेसर
डॉ. चैतन्य ने रश्मिरथी के अंशों का पाठ किया।
डॉ. राजीव, डॉ. रुचि, डॉ. ब्रजेश और प्रिंस कुमार ने अपने विचार रखे, जबकि छात्र अविनाश और दिलखुश ने कविता पाठ किया। इस समारोह में
डॉ. अमृता, डॉ. सोनम, डॉ. सैफ, डॉ. अरुण और कई अन्य छात्र भी उपस्थित रहे।