भागलपुर और नवगछिया में 6 प्राइवेट क्लीनिकों पर लगा 50 हजार का जुर्माना, बिना लाइसेंस और कचरा नियमों के उल्लंघन पर हुई कार्रवाई

Hariom Mishra5 April 20262 min read96 viewsCity Local
भागलपुर और नवगछिया में 6 प्राइवेट क्लीनिकों पर लगा 50 हजार का जुर्माना, बिना लाइसेंस और कचरा नियमों के उल्लंघन पर हुई कार्रवाई

भागलपुर जिले में बिना लाइसेंस और साफ-सफाई के नियमों का उल्लंघन कर चल रहे निजी क्लीनिकों पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। स्वास्थ्य विभाग ने भागलपुर शहर और नवगछिया अनुमंडल में कुल छह निजी क्लीनिकों और नर्सिंग होम पर 50,000-50,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी के निर्देश पर सिविल सर्जन डॉक्टर अशोक प्रसाद की टीम ने यह कार्रवाई की है। जिला प्रशासन को लगातार इन अवैध नर्सिंग होम के खिलाफ शिकायतें मिल रही थीं।

किन नियमों के उल्लंघन पर हुई कार्रवाई?

प्रशासन की जांच में पाया गया कि ये अस्पताल सरकारी मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज कर रहे थे। जांच के दौरान कई गंभीर कमियां सामने आईं जिसके बाद जुर्माना लगाने का फैसला लिया गया। इन क्लीनिकों पर कार्रवाई के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

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  • बिहार क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत वैध रजिस्ट्रेशन का न होना।
  • Biomedical Waste Management Rules 2016 के नियमों की अनदेखी करना।
  • अस्पताल में योग्य मेडिकल एक्सपर्ट और प्रशिक्षित स्टाफ की भारी कमी।
  • अनिवार्य साइनबोर्ड और अस्पताल की जानकारी देने वाले बोर्ड का अभाव।
  • आयुर्वेदिक और यूनानी पद्धति से पंजीकृत होकर एलोपैथिक दवाओं से इलाज करना।

जर्माना झेलने वाले अस्पतालों की सूची और आधिकारिक बयान

सिविल सर्जन डॉक्टर अशोक प्रसाद ने बताया कि पकड़े गए अस्पतालों में से पांच नवगछिया क्षेत्र के हैं और एक भागलपुर शहर का है। मुंदीचक स्थित J.S. Clinic और हरनाथचक स्थित Chitransh Health Care जैसे नाम इस कार्रवाई के दायरे में आए हैं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट आदेश दिया है कि भविष्य में भी ऐसी औचक जांच जारी रहेगी।

क्लीनिक का विवरण जुर्माने की राशि
कुल 6 निजी क्लीनिक और नर्सिंग होम 50,000 रुपये प्रत्येक
कार्रवाई का क्षेत्र भागलपुर और नवगछिया
नियम उल्लंघन बिना लाइसेंस और कचरा प्रबंधन में लापरवाही

प्रशासन ने कहलगांव, भागलपुर और नवगछिया के PHC प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में चल रहे सभी स्वास्थ्य केंद्रों की जांच करें। बिहार सरकार के 2025 के संशोधित नियमों के अनुसार, भले ही छोटे अस्पतालों को रजिस्ट्रेशन में कुछ छूट हो, लेकिन उन्हें क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के मानकों का पालन करना ही होगा। अयोग्य डॉक्टरों द्वारा किए जा रहे इलाज पर विभाग की पैनी नजर है।

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