भागलपुर में 80 लाख का वृद्धाश्रम तैयार, लेकिन लापरवाही से लटका ताला

भागलपुर के नाथनगर के मस्कन बरारी में 80 लाख रुपये से अधिक की लागत से बना नया वृद्धाश्रम पांच महीने बीत जाने के बाद भी प्रशासनिक लालफीताशाही और अधूरे कागजी काम के कारण शुरू नहीं हो पाया है। हालांकि सरकार ने 1 अप्रैल तक यह सुविधा समाज कल्याण विभाग को सौंपने का निर्देश दिया था, लेकिन ट्रांसफर की प्रक्रिया रुकी हुई है। स्थानीय वार्ड पार्षद प्रीति देवी ने बताया कि हाल ही में परिसर से कई सामान हटाए गए हैं। लगभग चार महीने पहले, विभागीय निर्देशों के तहत, नगर निगम ने पिछली संचालन एजेंसी का अनुबंध समाप्त कर दिया था। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य गोरैडीह में एक किराए के भवन में चल रहे मौजूदा वृद्धाश्रम को इस नए, आधुनिक 40 लोगों की क्षमता वाले भवन में शिफ्ट करना था। हालांकि, समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि शौचालय सहित जरूरी काम अधूरे हैं। विभाग का कहना है कि जब तक सभी सुविधाएं पूरी तरह से चालू नहीं हो जातीं, तब तक वह चार्ज नहीं लेगा, और इस बात की जानकारी उसने पहले ही औपचारिक नोटिस के जरिए नगर निगम को दे दी है। पिछले छह महीनों से लाखों रुपये के सामान और इस जगह की सुरक्षा सिर्फ दो महिला पुलिसकर्मियों के भरोसे है। साल 2009 में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट 17 साल बाद भी पूरी तरह से चालू नहीं हो पाया है। दोनों विभागों के बीच इस तालमेल की कमी का असर बेसहारा बुजुर्गों पर पड़ रहा है, जिन्हें अभी भी किराए के भवन में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। चार्ज लेने की स्थिति के बारे में भागलपुर के एडीएसएस और एसडीओ अंकित चौधरी ने बताया कि उन्हें पहले समाज कल्याण विभाग से वृद्धाश्रम के चार्ज को लेकर निर्देश मिले थे, लेकिन नगर निगम की तरफ से इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किया गया है। निगम द्वारा ट्रांसफर और विभाग से मिलने वाले निर्देशों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।