बभागलपुर में पैक्स अध्यक्षों का बड़ा फैसला, बकाया भुगतान नहीं मिलने पर धान खरीद से किया इनकार

भागलपुर के शाहकुंड में पैक्स अध्यक्षों ने आने वाले धान खरीद सीजन में शामिल होने से साफ मना कर दिया है। शाहकुंड ब्लॉक मुख्यालय में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया और अधिकारियों ने स्टेट फूड कॉर्पोरेशन (एसएफसी) की वजह से आई पैसों की तंगी का हवाला दिया। पैक्स नेताओं के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) समय पर देने के बाद भी एसएफसी से पेमेंट मिलने में बहुत देरी हुई। इस देरी की वजह से सोसाइटियों पर ब्याज का बोझ बढ़ गया और सीधा नुकसान उठाना पड़ा। अध्यक्षों ने ऐलान किया है कि जब तक इस देरी की वजह से लगे ब्याज का पूरा पैसा वापस नहीं मिलता, वे धान खरीद का काम शुरू नहीं करेंगे।
यह विरोध पूरे बिहार में खरीद के मुद्दों को लेकर चल रहे असंतोष का हिस्सा है। इसी तरह की चिंताएं 8 अक्टूबर 2026 को फारबिसगंज, अररिया के पैक्स प्रतिनिधियों ने उठाई थीं और 1 नवंबर से शुरू होने वाली खरीद से हटने की चेतावनी दी थी। 9 अक्टूबर को नालंदा सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक समेत 22 सहकारी बैंकों के प्रतिनिधियों ने सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव को एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने अगस्त 2026 तक पैक्स पर 174 करोड़ रुपये का ब्याज बकाया होने की बात कही और बताया कि खरीद कमिशन और मिलिंग चार्ज 2012-13 सीजन से ही एक जैसे हैं।
दूसरी तरफ, बिहार सरकार 2026-27 के खरीफ विपणन सीजन की तैयारी कर रही है, जो 1 नवंबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक तय किया गया है। राज्य ने केंद्र सरकार से खरीद का लक्ष्य 35 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 50 लाख मीट्रिक टन करने को कहा है। सामान्य धान के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2441 रुपये प्रति क्विंटल और ए-ग्रेड धान के लिए 2461 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो पिछले साल से 72 रुपये प्रति क्विंटल ज्यादा है। इन तनावों के बीच, सहकारिता विभाग सीवान के नौ डिफॉल्टिंग पैक्स से लगभग 1.81 करोड़ रुपये के 467.91 टन चावल की वसूली भी कर रहा है, और अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि 22 अक्टूबर 2026 तक कैश क्रेडिट लोन नहीं चुकाए गए तो एफआईआर या संपत्ति की नीलामी की जा सकती है।