भागलपुर पुलिस ने फर्जी डीएसपी बनकर नौकरी और ट्रांसफर के नाम पर ठगी करने वाले फरार मनोज कुमार वर्मा के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों ने उसकी संपत्ति कुर्क करने से पहले उसके घर पर जाकर ढोल बजाया।
- मनोज कुमार वर्मा 1989 में सिपाही के रूप में नियुक्त हुआ था और बिहार पुलिस में संदेशवाहक के रूप में काम करता था।
- एसएसपी प्रमोद यादव की जांच में पुष्टि हुई कि वह डीएसपी नहीं है।
- उसने सीआईडी या स्पेशल ब्रांच का अधिकारी बनकर कई लोगों के साथ ठगी की।
बांका की कैंसर पीड़िता सोनम भारती से सबौर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय में नौकरी दिलाने के नाम पर 5.60 लाख रुपये ठगे गए। अन्य पीड़ितों में
महेश कुमार शाह हैं जिनके साथ फर्जी चेक से ठगी हुई,
शशि भूषण चौधरी हैं जिन्होंने पेंडिंग केस से नाम हटाने के लिए 3.5 लाख रुपये दिए,
कौशल कुमार हैं जिन्होंने एनटीपीसी में नौकरी के लिए 2 लाख रुपये दिए, और
किरण चौधरी हैं जिन्होंने नौकरी के लिए 90,000 रुपये दिए थे जिसमें से 52,000 रुपये बाद में वापस कर दिए गए।
मनोज वर्मा के खिलाफ इशाकचक और बायपास थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। उसके फरार होने के कारण उसका मोबाइल फोन स्विच ऑफ है। पुलिस ने उसके घर पर छापेमारी के दौरान एक लाइसेंसी हथियार बरामद किया था और नियमों के उल्लंघन के कारण उसका लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। पीड़ितों के वकील राजीव कुमार सिंह कानूनी कार्रवाई में जुटे हैं, जबकि पुलिस आरोपी को सरेंडर करने के लिए वारंट और जब्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है।