भागलपुर में प्रदूषण नियंत्रण की समीक्षा करने पहुंची विधान परिषद की पर्यावरण समिति

बिहार विधान परिषद की पर्यावरण समिति ने भागलपुर का दौरा कर गंगा की सफाई और प्रदूषण नियंत्रण उपायों का जायजा लिया।

Puja Singh5 November 20262 min read0 viewsCity Local
भागलपुर में प्रदूषण नियंत्रण की समीक्षा करने पहुंची विधान परिषद की पर्यावरण समिति

बिहार की गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए बिहार विधान परिषद की पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण समिति ने भागलपुर का दौरा किया। एमएलसी रविंद्र प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में दस सदस्यीय इस प्रतिनिधिमंडल ने शहर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत समीक्षा की। बांका में प्रोजेक्ट रिव्यू के बाद समिति के सदस्य भागलपुर सर्किट हाउस पहुंचे, जहां विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक हुई।

इस बैठक में वन एवं पर्यावरण विभाग, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग समेत कई अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद थे। चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि शहर का एक बड़ा हिस्सा अभी भी सीधे तौर पर सीवेज और गंदगी गंगा नदी में बहा रहा है, जो पर्यावरण के लिए एक गंभीर चुनौती है।

गंगा की सफाई और ड्रेनेज सिस्टम पर सख्त निर्देश

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समिति के अध्यक्ष रविंद्र प्रसाद सिंह ने नगर निगम के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि गंगा के तटों पर कचरा फेंकने की प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नदी के किनारों को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त रखना प्राथमिकता होनी चाहिए। साथ ही, शहर के ड्रेनेज सिस्टम (निकासी प्रणाली) को दुरुस्त करने का निर्देश दिया गया ताकि गंदा पानी सीधे गंगा में मिलने के बजाय उचित प्रबंधन के जरिए साफ हो सके।

समीक्षा बैठक के बाद समिति ने केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहकर जमीनी हकीकत भी देखी। रविंद्र प्रसाद सिंह ने सर्किट हाउस में पौधरोपण किया और फिर नदी तट पर जाकर प्रदूषण के स्तर का निरीक्षण किया। इसके बाद समिति के सदस्य वन विभाग के साथ स्टीमर के जरिए विक्रमशिला गंगेटिक डॉल्फिन सैंक्चुअरी पहुंचे। वहां डॉल्फिनों को देखकर समिति ने नदी के पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) के प्रति संतोष जताया।

दौरे के अंतिम चरण में प्रतिनिधिमंडल ने विक्रमशिला सेतु पर चल रहे मरम्मत कार्य का भी निरीक्षण किया। गौरतलब है कि इस निर्माण कार्य से गंगा में होने वाले प्रदूषण का मामला पहले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) तक पहुंच चुका है, इसलिए समिति ने यहां विशेष सावधानी और नियमों के पालन पर जोर दिया।

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