भागलपुर के पॉश इलाके में शराबबंदी की खुली पोल, दिनदहाड़े नशे में झूमते दिखे लोग

Hariom Mishra20 February 20262 min read34 viewsCity Local
भागलपुर के पॉश इलाके में शराबबंदी की खुली पोल, दिनदहाड़े नशे में झूमते दिखे लोग

भागलपुर के सबसे सुरक्षित और पॉश माने जाने वाले इलाके में शराबबंदी के दावों पर सवाल उठने लगे हैं। प्रभात खबर द्वारा जारी एक वीडियो में प्रशासनिक दफ्तरों के पास ही कुछ लोग दिनदहाड़े नशे की हालत में लड़खड़ाते नजर आए। यह घटना 20 फरवरी 2026 की है, जिसने सोशल मीडिया पर काफी चर्चा छेड़ दी है। हैरानी की बात यह है कि नशे को छिपाने के लिए ये लोग नींबू पानी का सहारा लेते दिखे।

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प्रशासनिक दफ्तरों के पास का है मामला

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वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि शहर के अतिमहत्वपूर्ण क्षेत्र, जहां बड़े अधिकारियों के दफ्तर हैं, वहां कुछ लोग नशे में धुत हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस जगह पर पुलिस और प्रशासन की सबसे ज्यादा नजर होनी चाहिए, वहीं पर शराब का सेवन हो रहा है। वीडियो में लोग नशा उतारने या उसकी महक कम करने के लिए नींबू पानी पीते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग कानून व्यवस्था पर बात कर रहे हैं।

सुरक्षा के दावों के बीच कैसे पहुंची शराब?

यह घटना इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि अभी दो दिन पहले ही 18 फरवरी को भागलपुर कलेक्ट्रेट को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। उस समय सुरक्षा बढ़ा दी गई थी और हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी। इतनी सख्ती के बावजूद, उसी इलाके में शराब का उपलब्ध होना और लोगों का खुलेआम पीना सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक की ओर इशारा करता है। इससे पहले 16 फरवरी को पुलिस ने एक ट्रक से करीब 20 लाख रुपये की 16 हजार से अधिक शराब की बोतलें भी जब्त की थीं।

सरकार का रुख और कानून

बिहार सरकार ने मौजूदा बजट सत्र के दौरान साफ कर दिया है कि शराबबंदी कानून में कोई ढील नहीं दी जाएगी। मंत्री विजय कुमार चौधरी ने 19 फरवरी को स्पष्ट किया है कि यह कानून बिना किसी समीक्षा के जारी रहेगा। मौजूदा स्थिति कुछ इस प्रकार है:

  • पहली बार शराब पीते पकड़े जाने पर 2000 से 5000 रुपये तक का जुर्माना देकर छूटने का प्रावधान है।
  • बार-बार पकड़े जाने पर जेल की सजा अनिवार्य है।
  • राज्य में 2016 से अब तक 12.8 लाख से ज्यादा गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।

बावजूद इसके, भागलपुर जैसे प्रमुख शहर के मुख्य इलाकों में ऐसी घटनाएं प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई हैं और आम जनता की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाती हैं।

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