भागलपुर में गंगा नदी के कटाव से रेलवे बांध टूटा, दहशत में लोग

MyBhagalpur Team11 October 20262 min read0 viewsSad/Bad
भागलपुर में गंगा नदी के कटाव से रेलवे बांध टूटा, दहशत में लोग

भागलपुर के राघोपुर में गंगा नदी के भीषण कटाव के कारण रेलवे बांध ढह गया। यह घटना शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 की शाम को शुरू हुई और रविवार, 11 अक्टूबर 2026 तक स्थिति गंभीर बनी रही। खरीक प्रखंड के छोटी अललपुर, महादेवपुर घाट, बिसुबा-ब्रह्म बाबा स्थान, शंकरपुर और नानकर गांव सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं।

  • राघोपुर रेलवे बांध का 150 से 300 मीटर हिस्सा नष्ट हो गया है।
  • 10 से 35 घर नदी में समा गए हैं और 25 घर खतरे में हैं।
  • ब्रह्म बाबा मंदिर और हनुमान मंदिर नष्ट हो गए हैं।
  • सक्रिय कटाव 500 मीटर क्षेत्र में फैला है।

प्रभावित क्षेत्र और नुकसान

भागलपुर के राघोपुर में रेलवे बांध का विनाशकारी ढहना गंगा नदी की गंभीर कटान के कारण हुआ। अधिकारियों की रिपोर्ट के अनुसार, राघोपुर रेलवे बांध का लगभग 150 से 300 मीटर हिस्सा नष्ट हो गया है। 10 से 35 घर पहले ही नदी में बह चुके हैं, जबकि 25 अतिरिक्त घर अभी भी उच्च जोखिम में बने हुए हैं। ब्रह्म बाबा मंदिर और हनुमान मंदिर जैसे महत्वपूर्ण स्थानीय स्थल भी नष्ट हो चुके हैं या नदी में समा रहे हैं। कटाव का कुल सक्रिय क्षेत्र लगभग 500 मीटर में फैला है, जो नंबर 14 सड़क की स्थिरता को और अधिक खतरे में डाल रहा है। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में छोटी अललपुर, महादेवपुर घाट, बिसुबा-ब्रह्म बाबा स्थान, शंकरपुर और खरीक प्रखंड का नानकर गांव शामिल हैं।

प्रशासनिक कार्रवाई और राहत कार्य

हजारों निवासियों को अपने घर खाली करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए लाउडस्पीकर का उपयोग किया है और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) बचाव कार्यों में सक्रिय रूप से लगा हुआ है। नवगछिया के एसपी वैभव शर्मा, अनुमंडल पदाधिकारी के. परीक्षित, एएसपी, डीसीएलआर, सीओ और बीडीओ सहित प्रशासनिक अधिकारी सूचना मिलते ही मौके पर पहुंच गए। भागलपुर की जिला मजिस्ट्रेट अलंकृता पांडेय ने भी नुकसान का निरीक्षण किया और विफलता को लेकर विभाग के इंजीनियरों को फटकार लगाई।

बिहार सरकार के मंत्रियों का दौरा और जनता का आक्रोश

बिहार सरकार के दो मंत्री राहत कार्यों की निगरानी के लिए मौके पर पहुंच गए हैं। हालांकि, इस स्थिति ने जनता के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। ग्रामीण पहले किए गए एंटी-इरोशन काम की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं, और उनका कहना है कि लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी बांध टूट गया। निवासियों ने अपनी शिकायतों को उजागर करते हुए वीडियो प्रसारित किए हैं, जिसमें विशेष रूप से ऊर्जा मंत्री शैलेंद्र कुमार द्वारा दिए गए पिछले आश्वासनों का हवाला दिया गया है, जिन्होंने कथित तौर पर बांध टूटने पर इस्तीफा देने का वादा किया था। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन समय पर बजरा जैसे आवश्यक उपकरण तैनात करने में विफल रहा।

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