भागलपुर-गोरडीह मुख्य मार्ग पर शीतला स्थान चौक के पास 125.86 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) का निर्माण कार्य भारी बाधाओं में फंस गया है। इस वजह से 16 दिसंबर 2027 की समयसीमा पर सवाल उठने लगे हैं। बाउन्सी रेल ब्रिज संख्या 2 पर बनने वाले इस पुल के निर्माण में जमीन की कमी और लगातार हो रहे अतिक्रमण की वजह से निर्माण एजेंसी को साइट पर जाने में बहुत परेशानी हो रही है।
इस प्रोजेक्ट से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
- पुल के लिए कुल 21 पिलर बनने हैं, जिनमें से 10 पिलर बन चुके हैं और 11वें पर काम चल रहा है।
- जमीन विवाद, तंग रास्तों और तकनीकी खराबी के कारण काम में रुकावट आई है।
- लापरवाही के चलते सितंबर 2026 में सीनियर प्रोजेक्ट इंजीनियर का तबादला कर दिया गया है।
- मंत्री ने अधिकारियों को जमीन अधिग्रहण और बाकी मंजूरियां जल्द पूरा करने का निर्देश दिया है।
स्वीकृत डिजाइन के अनुसार पुल के लिए 21 पिलर की जरूरत है।
दस पिलर खड़े कर दिए गए हैं और 11वां अभी बन रहा है, लेकिन हैमरहेड लगाने का काम रुक गया है। केवल पिलर नंबर तीन का हैमरहेड पूरा हुआ है और पिलर नंबर छह पर काम जारी है। इंजीनियरों का कहना है कि तंग सड़कों और रिहायशी इमारतों के पास होने की वजह से पिलर चार, पांच, आठ और नौ का निर्माण बहुत कठिन है। इसके अलावा, करीब साढ़े तीन महीने पहले तकनीकी खराबी आ गई थी जब पिलर 13 और 20 की पाइलिंग जमीन में 10 से 12 मीटर धंस गई थी। इसके बाद रेलवे और निर्माण विशेषज्ञों से इसकी जांच करवाकर नया डिजाइन तैयार करना पड़ा।
प्रोजेक्ट में देरी होने के बाद प्रशासनिक निगरानी बढ़ा दी गई है।
सितंबर 2026 में बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड (बीआरपीएनएनएल) ने लापरवाही की शिकायतों के बाद सीनियर प्रोजेक्ट इंजीनियर ज्ञान चंद्र दास को मुख्यालय ट्रांसफर कर दिया। प्रबंध निदेशक जितेंद्र कुमार ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। नए सीनियर प्रोजेक्ट इंजीनियर की नियुक्ति होने तक सहायक इंजीनियर आकाशदीप कुमार को प्रभार दिया गया है। 23-24 सितंबर 2026 को सड़क निर्माण मंत्री इंजीनियर कुमार शैलेंद्र ने प्रोजेक्ट की समीक्षा की और अधिकारियों को जमीन अधिग्रहण में तेजी लाने तथा रेलवे और वन विभाग की पेंडिंग मंजूरियों को हल करने का निर्देश दिया।
इस प्रोजेक्ट को औपचारिक प्रशासनिक मंजूरी 2 अगस्त 2026 को मिली थी, हालांकि निर्माण जून 2025 से ही चल रहा था।
जून 2025 में वार्ड 48 और 49 के लोगों ने प्रदर्शन किया था और जमीन अधिग्रहण को लेकर पारदर्शिता तथा उचित मुआवजे की मांग की थी। स्थानीय प्रशासन, सड़क निर्माण विभाग और बीआरपीएनएनएल मिलकर इन जमीन विवादों को सुलझाने में लगे हैं ताकि प्रोजेक्ट फिर से रफ्तार पकड़ सके।