विक्रमशिला-कटारिया रेलवे प्रोजेक्ट: मुआवजे में भेदभाव पर भड़के भागलपुर के ग्रामीण
भागलपुर के अजमाबाद गांव के ग्रामीणों ने रेलवे प्रोजेक्ट में मुआवजे में भेदभाव का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया और पुनर्वास की मांग की।

भागलपुर जिले के अजमाबाद गांव में शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को उस समय माहौल गरमा गया, जब बड़ी संख्या में ग्रामीण नए विक्रमशिला-कटारिया रेलवे प्रोजेक्ट के खिलाफ एकजुट हुए। ग्रामीणों ने जमीन अधिग्रहण और मुआवजे की प्रक्रिया में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए एक महत्वपूर्ण बैठक की। उनका कहना है कि रेलवे प्रोजेक्ट के कारण कई परिवार अपनी पुश्तैनी जमीनों से बेघर हो रहे हैं, लेकिन प्रशासन उन्हें उचित हक नहीं दे रहा है।
ग्रामीणों का सबसे गंभीर आरोप यह है कि अधिकारियों द्वारा एक ही श्रेणी की जमीनों के लिए अलग-अलग मुआवजे की दरें तय की गई हैं। इस भेदभाव से नाराज लोगों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नियमों को ताक पर रखकर किन लोगों को फायदा पहुंचाया गया। ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक सभी प्रभावित जमीन मालिकों को तय नियमों के अनुसार सही मुआवजा नहीं मिलता, वे शांत नहीं बैठेंगे।
सिर्फ पैसा नहीं, स्थायी घर और पुनर्वास की मांग
बैठक के दौरान ग्रामीणों ने इस बात पर जोर दिया कि केवल मौद्रिक मुआवजा उनके जीवन की भरपाई नहीं कर सकता। सालों से एक जगह बसे परिवारों के लिए जमीन खोना केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि एक सामाजिक संकट भी है। इसी को देखते हुए उन्होंने सरकार के सामने कुछ ठोस शर्तें रखी हैं:
- सभी विस्थापित परिवारों के लिए एक ही स्थान पर स्थायी आवास की व्यवस्था की जाए।
- यह पुनर्वास कॉलोनी सड़क के किनारे विकसित की जाए ताकि लोगों को आवागमन में सुविधा हो।
- पुनर्वास की प्रक्रिया पारदर्शी हो और इसमें किसी भी तरह की धांधली न हो।
अब सबकी नजरें जिला प्रशासन, भू-अर्जन विभाग और रेलवे विभाग पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि प्रशासन इन जायज मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या विस्थापित परिवारों को उनका हक मिल पाता है या यह विरोध और उग्र रूप लेगा।