डिजिटल क्रांति और ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते चलन ने भागलपुर के पारंपरिक राखी व्यवसाय की कमर तोड़ दी है। कभी रक्षाबंधन के त्योहार पर लाखों का टर्नओवर करने वाले स्थानीय छोटे दुकानदार आज अपनी लागत निकालने के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि कई दुकानदारों ने अगले साल से इस धंधे को हमेशा के लिए बंद करने का मन बना लिया है।
कुछ साल पहले तक भागलपुर के मुख्य बाजारों जैसे सुजागंज, वेरायटी चौक और खलीफाबाग में रक्षाबंधन से एक हफ्ते पहले पैर रखने की जगह नहीं होती थी।
एक साधारण सीजनल दुकानदार भी त्योहार के दौरान आसानी से 40 से 50 हजार रुपये का मुनाफा कमा लेता था। लेकिन अब बाजार का मंजर बदला हुआ है। दुकानदारों के मुताबिक, अब सीजन भर में 10 हजार रुपये की कमाई करना भी आफत बन गया है।
स्थानीय राखी व्यवसायी पंकज ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि हम हर साल इस सीजन के लिए महीनों पहले से तैयारी करते थे।
कोलकाता के थोक बाजारों से चुन-चुनकर नई डिजाइन की राखियां लाते थे, जिनकी बाजार में भारी मांग होती थी। सीजन में 50 हजार रुपये तक की साफ बचत हो जाती थी, जिससे परिवार की कई जरूरतें पूरी होती थीं। लेकिन अब 10 हजार रुपये भी हाथ में आते नहीं दिख रहे हैं। पंकज जैसे सैकड़ों छोटे दुकानदारों के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने हताश होकर कहा कि ऑनलाइन कंपनियों ने हमारे पेट पर लात मार दी है। लोग अब घर बैठे ही मोबाइल से राखियां ऑर्डर कर रहे हैं। अगर यही स्थिति रही, तो हमारे सामने भुखमरी की नौबत आ जाएगी।
मैंने तय कर लिया है कि अगले साल से राखी का यह धंधा पूरी तरह बंद कर दूंगा और कोई दूसरा काम ढूंढूंगा। ऑनलाइन साइट्स पर आकर्षक कॉम्बो पैक्स जैसे राखी के साथ रोली, चंदन और मिठाई की होम डिलीवरी उपलब्ध है। दूर रहने वाले भाइयों के लिए बहनें सीधे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से ही उनके पते पर राखी कूरियर कर रही हैं, जिससे बाजार जाने की जरूरत खत्म हो गई है। बड़ी ऑनलाइन कंपनियां भारी डिस्काउंट और अंतहीन वैरायटी ऑफर करती हैं, जिसका मुकाबला करना छोटे पूंजी वाले दुकानदारों के लिए असंभव है। स्थानीय व्यापारिक संघों का कहना है कि यदि पारंपरिक त्योहारों के बाजार को ऑनलाइन के एकाधिकार से नहीं बचाया गया, तो छोटे और सीमांत फुटपाथ दुकानदार पूरी तरह से खत्म हो जाएंगे। त्योहारी सीजन ही इन छोटे व्यापारियों की सालभर की आजीविका का मुख्य सहारा होता है, जो अब उनसे छिनتا जा रहा है।