भागलपुर के सरकारी स्कूलों में हाजिरी का संकट: 1.65 लाख छात्रों का रजिस्ट्रेशन अब तक अधूरा

भागलपुर जिले के सरकारी स्कूलों में फेस रिकग्निशन (चेहरा पहचान) आधारित उपस्थिति व्यवस्था लागू करने में भारी लापरवाही सामने आई है। नए शैक्षणिक सत्र को शुरू हुए चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन यह व्यवस्था अब भी कागजों तक ही सीमित है। शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले के कुल 5,33,913 विद्यार्थियों में से केवल 3,68,894 (करीब 69 प्रतिशत) बच्चों का पंजीकरण हो पाया है, जबकि 1,65,021 (करीब 31 प्रतिशत) छात्र अब भी रजिस्ट्रेशन से बाहर हैं।
पंजीकरण की इसी धीमी रफ्तार के कारण जिले के केवल दो प्रतिशत स्कूलों में ही ट्रायल मोड पर उपस्थिति दर्ज की जा रही है, बाकी स्कूलों में यह व्यवस्था शुरू ही नहीं हो सकी है। हालांकि, शिक्षा विभाग ने कई बार शत-प्रतिशत पंजीकरण पूरा करने और नियमित हाजिरी लागू करने के निर्देश दिए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका कोई असर नहीं दिख रहा है। इस लापरवाही के कारण तकनीकी शिक्षकों की कार्यशैली और जिला शिक्षा विभाग की मॉनिटरिंग पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
छात्रों की तुलना में शिक्षकों का पंजीकरण बेहतर स्थिति में है। जिले के 17,238 शिक्षकों में से 16,891 का रजिस्ट्रेशन पूरा हो चुका है और केवल 371 शिक्षक ही रजिस्टर्ड नहीं हैं। अगर नियमित समीक्षा और जवाबदेही तय की जाती, तो चार महीने बाद भी इतनी बड़ी संख्या में छात्र पंजीकरण से वंचित नहीं रहते।
ब्लॉकवार स्थिति देखें तो कहलगांव में सबसे ज्यादा 22,278 छात्र और पीरपैंती में 20,297 छात्र बिना रजिस्ट्रेशन के हैं। इसके अलावा नगर निगम में 11,608, खरीक में 10,105, जगदीशपुर में 9,734, गोराडीह में 8,696, अजगवीनाथ धाम में 8,645, शाहकुंड में 7,968, नाथनगर में 7,185, सबौर में 7,695, बिहपुर में 6,382 और रंगरा चौक में 6,355 छात्र अभी तक पंजीकृत नहीं हुए हैं।