इजरायल-ईरान युद्ध से भागलपुर का सिल्क व्यापार ठप, 25 करोड़ का नुकसान हुआ

Hariom Mishra28 March 20262 min read7 viewsBusiness
इजरायल-ईरान युद्ध से भागलपुर का सिल्क व्यापार ठप, 25 करोड़ का नुकसान हुआ

फरवरी 28, 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की। इस बड़े संघर्ष का असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा और खास तौर पर भागलपुर का मशहूर सिल्क उद्योग गंभीर मुश्किलों में आ गया है। इस युद्ध के कारण भागलपुर में लगभग 20 से 25 करोड़ रुपये के सिल्क ऑर्डर रद्द हो गए हैं या फिर उनमें बहुत देरी हुई है।

🚨: भागलपुर के इशाकचक में युवक ने की खुदकुशी, रोजगार के लिए पिता से मांगे थे रुपये

भागलपुर के सिल्क व्यवसाय पर युद्ध का सीधा असर

मध्य पूर्व में चल रहे इस युद्ध ने भागलपुर के सिल्क बुनकरों और व्यापारियों की रोजी-रोटी पर बुरा असर डाला है। निर्यात के कई ऑर्डर रुक गए हैं, जिससे 20-25 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है। युद्ध की वजह से सिल्क धागे की कीमतें भी बढ़ गई हैं, जबकि खरीदार तैयार माल के लिए कम दाम मांग रहे हैं। यदि यह स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो कई कारीगरों को अपने करघे बंद करने पड़ सकते हैं और उन्हें काम की तलाश में दूसरे राज्यों में जाना पड़ सकता है, जिससे भागलपुर की सदियों पुरानी बुनाई परंपरा खतरे में पड़ जाएगी।

वैश्विक व्यापार और भारत पर आर्थिक चुनौतियाँ

मार्च की शुरुआत में, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया, जिससे वैश्विक तेल और गैस का निर्यात रुक गया और तेल उद्योग में बड़ी उथल-पुथल मच गई। इससे माल ढुलाई के खर्च और समुद्री बीमा प्रीमियम में बढ़ोतरी हुई है। इंडियन कंपनियों को शिपमेंट में देरी और जरूरी कच्चे माल की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) ने कहा है कि भारतीय कंपनियाँ इस संघर्ष के ‘डाउनवर्ड रिपल इफेक्ट्स’ का अनुभव कर रही हैं, क्योंकि इससे प्रमुख समुद्री मार्ग बाधित हो रहे हैं और वैश्विक बाजारों में आपूर्ति की स्थिति बिगड़ रही है। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि भारत बाहरी झटकों को झेलने के लिए पहले से बेहतर स्थिति में है।

युद्ध की मुख्य घटनाएँ और वैश्विक प्रभाव

यह सैन्य अभियान, जिसे अमेरिका ने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” और इजरायल ने “रोअरिंग लायन” नाम दिया, 28 फरवरी, 2026 को शुरू हुआ। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई सहित कई ईरानी अधिकारी मारे गए। ईरान ने इसके जवाब में इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। 27 मार्च, 2026 तक, इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने तेहरान में ईरानी शासन के ठिकानों को निशाना बनाया है। इस युद्ध ने तेल की कीमतों में तुरंत 8-9% की वृद्धि की है, जो कई महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुँच गई है। कर्नाटक के परिधान और सिल्क उद्योग को भी निर्यात में रुकावट और परिवहन लागत में वृद्धि का सामना करना पड़ा है, जिसके कारण मार्च 2026 के लिए नए परिधान ऑर्डर में 25-30% की गिरावट का अनुमान है।

Share:

Comments

Leave a comment