भागलपुर के सोहता उत्तर पंचायत का काली मंदिर बना आस्था का बड़ा केंद्र
भागलपुर के सोहता उत्तर पंचायत स्थित काली मंदिर अपनी महिमा और भव्य मेले के लिए प्रसिद्ध है। जानिए इस आस्था केंद्र की खासियत।

बिहार के भागलपुर जिले में स्थित फलका ब्लॉक की सोहता उत्तर पंचायत अब अपनी एक खास पहचान बना चुकी है। यहाँ के गांधी ग्राम बरेटा में स्थित भागलपुर काली मंदिर सोहता अपनी अद्भुत महिमा और आध्यात्मिक शांति के कारण स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आस्था का एक बड़ा केंद्र बन गया है।
मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन और शुद्ध intentions के साथ माँ काली के दरबार में हाजिरी लगाता है, उसकी हर मुराद पूरी होती है। यही वजह है कि साल भर यहाँ भक्तों का तांता लगा रहता है। इस मंदिर की यात्रा जितनी सुकून देने वाली है, उतनी ही प्रेरणादायक भी है।
झोपड़ी से भव्य मंदिर तक का सफर और दिवाली की रौनक
इस मंदिर की कहानी बेहद दिलचस्प है। कभी यह मंदिर घास-फूस की एक साधारण सी झोपड़ी हुआ करता था, लेकिन ग्रामीणों की अटूट श्रद्धा और सामूहिक सहयोग ने इसे आज एक भव्य स्वरूप दे दिया है। भक्तों की आस्था इतनी गहरी है कि मन्नत पूरी होने पर वे यहाँ सोने-चांदी की बिंदी और कीमती आभूषण चढ़ाते हैं, साथ ही मूर्तियों के निर्माण में भी अपना योगदान देते हैं।
जब काली पूजा का समय आता है, तो मंदिर का नजारा पूरी तरह बदल जाता है। चारों तरफ रंग-बिरंगी रोशनी और भव्य सजावट श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देती है। इस मौके पर यहाँ एक विशाल मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें शहर और गांव के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
- सांस्कृतिक कार्यक्रम: मेला समिति द्वारा हर साल विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
- बच्चों का आकर्षण: मेले में रंगीन झूले, खिलौनों की दुकानें और चाट-चाउमीन जैसे फूड स्टॉल्स युवाओं और बच्चों के बीच मुख्य आकर्षण का केंद्र रहते हैं।
- सामुदायिक एकता: यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि ग्रामीण एकता और सहयोग की मिसाल भी पेश करता है।