अरे बापरे! गंगा के बाढ़ से भागलपुर-सुल्तानगंज का सड़क संपर्क पूरी तरह टूटा

गंगा नदी की भयंकर बाढ़ से बिहार के भागलपुर में 8 सितंबर 2026 को आम जनजीवन पूरी तरह से ठप हो गया है। अकबरनगर और भवननाथपुर के पास नेशनल हाईवे (NH-80) और वैकल्पिक मुंगेर-मिर्ज़ाचौकी ग्रीनफील्ड फोर-लेन हाईवे दोनों पानी में डूब गए हैं, जिससे भागलपुर और सुल्तानगंज के बीच का जरूरी सड़क संपर्क टूट गया है।
भवननाथपुर में NH-80 के 200 मीटर हिस्से पर 2.5 से 3 फीट की गहराई तक पानी बह रहा है, जबकि फोर-लेन एक्सप्रेसवे पर लगभग दो फीट पानी भरा हुआ है। सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर 36.78 मीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जिसने पिछले 36.75 मीटर के उच्चतम स्तर को पार कर लिया है।
प्रशासन का सख्त कदम और सुरक्षा व्यवस्था
भागलपुर के अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) ने प्रभावित भवननाथपुर हिस्से के पास सभी गाड़ियों और पैदल चलने वालों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। प्रशासन के अधिकारियों ने साइट के दोनों सिरों पर बैरिकेड लगा दिए हैं, और स्थिति पर 24 घंटे नजर रखने के लिए पुलिस बल तथा मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं।
शहरी इलाकों और दियारा क्षेत्र का हाल
इस बीच, मणिक सरकार घाट रोड, साखीचंद घाट रोड, आदमपुर बैंक कॉलोनी, कोयला घाट रोड, किलाघाट और नया बाजार सहित भागलपुर के कई शहरी इलाकों में पानी घुस गया है। दियारा क्षेत्र के रहने वाले लोग दूध और सब्जी जैसी जरूरी चीजें खरीदने के लिए निजी नावों का सहारा लेने को मजबूर हैं।
यातायात और ट्रेन सेवाएं प्रभावित
सड़क बंद होने के कारण यात्रियों के ट्रेनों की तरफ रुख करने से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर भारी दबाव है। स्थिति तब और पेचीदा हो गई जब रेल सेवाएं भी बाधित हुईं; 4 सितंबर से पुल संख्या 21 पर परिचालन बंद होने के कारण पटना-गया रूट पर 10 ट्रेनें रद्द या डायवर्ट की गई हैं। सुल्तानगंज-जमालपुर खंड पर रेल पुलों के गर्डर तक पानी पहुंच गया है।
मंगलवार, 8 सितंबर को सुल्तानगंज में बाढ़ के पानी में डूबने से एक बच्चे की दर्दनाक मौत हो गई।
जलस्तर और आगे की स्थिति
जिला मजिस्ट्रेट अलंकृता पांडेय ने बताया कि 7 सितंबर को समाप्त 24 घंटे की अवधि में भागलपुर में जलस्तर 16 सेंटीमीटर और कहलगांव में 18 सेंटीमीटर बढ़ा, जबकि ऊपर की ओर इलाहाबाद, वाराणसी और बक्सर में जलस्तर घटना शुरू हो गया है। अधिकारियों को अगले 36 से 48 घंटों के भीतर भागलपुर में जलस्तर कम होने की उम्मीद है। जब तक पानी का बहाव कम नहीं होता और सड़कों को तकनीकी रूप से सुरक्षित घोषित नहीं किया जाता, तब तक यात्रा प्रतिबंध लागू रहेगा।