भागलपुर जिला शिक्षा विभाग में 98.12 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आने के बाद अधिकारियों ने शिक्षकों के वेतन भुगतान को लेकर कड़े नियम बना दिए हैं। अक्टूबर महीने का वेतन मिलने से पहले विभाग प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक विद्यालयों तक के सभी शिक्षकों की जांच करेगा, जिसमें नियुक्ति रिकॉर्ड से लेकर बैंक खाते की जानकारी तक सब कुछ परखा जाएगा। जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने सभी प्रखंड शिक्षा अधिकारियों और स्कूल के प्रधानाध्यापकों को सख्ती से पालन करने का आदेश दिया है।
स्कूल के प्रधानाध्यापकों को शिक्षकों की पूरी जानकारी तय फॉर्मेट में भरकर 13 अक्टूबर तक डीईओ ऑफिस में जमा करनी होगी।
इस डेटा में शिक्षक का नाम, ई-शिक्षककोश आईडी, एचआरएमएस कर्मचारी आईडी, नियुक्ति और ज्वाइनिंग की तारीख, बैंक खाता संख्या और आईएफएससी कोड होना चाहिए। इसके साथ ही नियुक्ति, ट्रांसफर और ज्वाइनिंग से जुड़े सभी कागजातों की सेल्फ-अटेस्टेड कॉपियां भी लगानी होंगी।
प्रखंड स्तर के अधिकारी स्कूलों से मिले डेटा को इकट्ठा करके 21 अक्टूबर तक स्थापना शाखा को फाइनल रिपोर्ट सौंपेंगे। विभाग ने बताया कि इस जांच का मकसद भुगतान प्रक्रिया में किसी भी तरह की वित्तीय गड़बड़ी या धोखाधड़ी को रोकना है।
शिक्षकों ने अपने सर्विस रिकॉर्ड और बैंक की जानकारी दोबारा जमा करने की मांग पर कड़ा विरोध जताया है।
कई शिक्षकों का कहना है कि वे पिछले 20 सालों से लगातार सेवा दे रहे हैं और उनके जरूरी कागजात पहले से ही विभाग के पास जमा हैं। उनका तर्क है कि यह बार-बार की मांग बेकार है, समय की बर्बादी है और इससे स्कूलों में पढ़ाई का काम बाधित होगा।