भागलपुर का तीन पहाड़ बनेगा राज्य स्मारक, गंगा में रोपवे और झूला का शानदार प्लान

MyBhagalpur Team9 September 20262 min read33 viewsTravel
भागलपुर का तीन पहाड़ बनेगा राज्य स्मारक, गंगा में रोपवे और झूला का शानदार प्लान

भागलपुर में गंगा नदी के बीच स्थित तीन पहाड़ को राज्य संरक्षित स्मारक घोषित करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। बिहार राज्य पर्यटन विभाग इस जगह पर पर्यटकों के लिए रोपवे और लक्ष्मण झूला बनाने की योजना पर काम कर रहा है।

  • तीन पहाड़ को राज्य संरक्षित स्मारक बनाने की प्रक्रिया तेज
  • गंगा नदी के बीच स्थित है तीन पहाड़
  • रोपवे और लक्ष्मण झूला बनाने की है योजना

जमीन का नक्शा तैयार करने का निर्देश

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9 सितंबर 2026 तक जिला कला और संस्कृति विभाग ने गोपालपुर और कहलगांव के अंचलाधिकारी यानी सीओ को इस जगह का आधिकारिक स्थलाकृतिक नक्शा और विस्तृत राजस्व रिकॉर्ड तैयार करने का औपचारिक निर्देश दे दिया है। इस जमीन का अधिकांश हिस्सा गोपालपुर अंचल के अंतर्गत आता है, लेकिन कहलगांव की तरफ से आने-जाने की सुविधा होने के कारण कहलगांव के सीओ को भी इस काम में सहयोग करने का निर्देश दिया गया है।

कहलगांव विधायक का प्रस्ताव और अधिकारियों के निर्देश

यह प्रोजेक्ट कहलगांव के विधायक शुभानंद मुकेश के प्रस्ताव से शुरू हुआ है। यह पहल पर्यटन सचिव के पिछले निर्देशों के बाद शुरू हुई है, जिन्होंने पहले राजस्व के अपर कलेक्टर और कहलगांव के एसडीओ से जमीन के मालिकाना हक, नक्शा, अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी और रखरखाव के नियमों को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने बताया कि सरकार का लक्ष्य बिहार की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ आधुनिक सुविधाओं को जोड़कर पर्यटन को बढ़ावा देना है।

ऐतिहासिक महत्व और पुरातात्विक आकलन

इस जगह का बहुत बड़ा इतिहास है। जुलाई 2025 में हुए पिछले पुरातात्विक सर्वे में इन पहाड़ियों की पहचान ऐतिहासिक स्थलों के रूप में हुई थी, जिन्हें पहले बुद्ध आश्रम, तपस आश्रम और नानकशाही आश्रम के नाम से जाना जाता था। इसके संरक्षण की योजना दिसंबर 2025 से चल रही है, जब बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम यानी बीएसटीडीसी ने विक्रमशिला विश्वविद्यालय, बटेश्वरस्थान, शाहकुंड पहाड़ और अजगैबीनाथ धाम के साथ तीन पहाड़ को भी मुख्य पर्यटन स्थलों की सूची में शामिल किया था। अधिकारी इस इलाके को बिहार प्राचीन पुरातात्विक अवशेष और कला खजाना अधिनियम, 1976 के तहत संरक्षित स्थल घोषित करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

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