भागलपुर में डीजे वाहनों पर चला प्रशासन का डंडा, 10 गाड़ियों से वसूला गया 3.5 लाख का जुर्माना

Pooja Kanjani25 February 20262 min read37 viewsCity Local
भागलपुर में डीजे वाहनों पर चला प्रशासन का डंडा, 10 गाड़ियों से वसूला गया 3.5 लाख का जुर्माना

भागलपुर में मोटर वाहन विभाग ने नियमों को ताक पर रखकर चलने वाले वाहनों के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। शहर में बिना अनुमति के गाड़ियों को मॉडिफाई कर डीजे बजाने वालों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। एमवीआई एस.एन. मिश्रा के नेतृत्व में चले इस अभियान के दौरान 10 कमर्शियल वाहनों को पकड़ा गया, जिनसे कुल 3.50 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया है। यह कार्रवाई पूरे बिहार में चल रहे 15 दिवसीय विशेष अभियान का हिस्सा है।

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किस वजह से हो रही है गाड़ियों की धरपकड़?

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अधिकारियों का कहना है कि शादियों और पार्टियों में इस्तेमाल होने वाले ये बड़े डीजे वाहन सड़क सुरक्षा के लिए खतरा बन गए हैं। अक्सर इन गाड़ियों के कारण एंबुलेंस का रास्ता ब्लॉक हो जाता है और शहर में लंबा जाम लग जाता है।

परिवहन मंत्री श्रवण कुमार के आदेश पर यह जांच शुरू की गई है। जांच में पाया गया कि कई गाड़ियों ने अपनी बनावट में अवैध बदलाव किए हैं, जिससे नंबर प्लेट भी छिप जाती है। मोबाइल रेस्टोरेंट और डीजे यूनिट जैसी 53 गाड़ियों की पहचान अब तक की जा चुकी है।

कितना देना पड़ सकता है जुर्माना और क्या है सजा?

मोटर वाहन अधिनियम के तहत किसी भी गाड़ी के ढांचे में बदलाव करना गैरकानूनी है। अगर कोई वाहन मालिक बिना आरसी में दर्ज कराए गाड़ी को मॉडिफाई करता है, तो उस पर भारी जुर्माना लग सकता है।

  • बनावट में बदलाव: इसके लिए 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
  • शोर प्रदूषण: तय सीमा से ज्यादा आवाज़ करने पर 2000 रुपये का अलग फाइन है।
  • पंजीकरण रद्द: धारा 55(5) के तहत गाड़ी का रजिस्ट्रेशन (RC) भी कैंसिल किया जा सकता है।
  • ताज़ा कार्रवाई: भागलपुर में पकड़े गए वाहनों पर औसतन 35,000 रुपये प्रति गाड़ी जुर्माना लगाया गया है।

मालिकों को मिली है 15 दिन की मोहलत

विभाग ने वाहन मालिकों को सुधरने का एक मौका दिया है। जिन गाड़ियों में अवैध निर्माण या डीजे सिस्टम लगा है, उन्हें हटाने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है।

अगर इस समय सीमा के अंदर गाड़ियों को पुरानी स्थिति में नहीं लाया गया, तो प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा। ऐसे वाहनों को जब्त करने के साथ-साथ उनका परमिट और रजिस्ट्रेशन हमेशा के लिए रद्द किया जा सकता है। डीटीओ जनार्दन कुमार भी इस पूरे अभियान पर नज़र बनाए हुए हैं।

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