पूर्वी बिहार के लिए बहुत जरूरी विक्रमशिला सेतु को 30 सितंबर की आधी रात से सभी गाड़ियों के आवागमन के लिए आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया गया है। यह फैसला तीन महीने के बड़े मरम्मत प्रोजेक्ट के लिए लिया गया है, जिसमें एक अस्थायी बेली ब्रिज को हटाना और चार बहुत खराब हो चुके स्पैन को बदलना शामिल है। इस 99 करोड़ रुपये के मरम्मत प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा करने के लिए बिहार राज्य पुल निर्माण निगम की देखरेख में गुवाहाटी और पटना के इंजीनियरों की एक खास तकनीकी टीम भागलपुर पहुंच गई है। सीमा सड़क संगठन की 80 सदस्यों की टीम और एसपी सिंगला एजेंसी इस काम को संभाल रही है। 1 अक्टूबर से टीमों को बेली ब्रिज को हटाने का काम सौंपा गया है, जिसमें लगभग 10 दिन लगने की उम्मीद है। इसके बाद हेली-कटर मशीनों का उपयोग करके चार जरूरी स्पैन हटाए जाएंगे और उनकी जगह आधुनिक स्थायी स्टील गर्डर या ट्रस ब्रिज लगाए जाएंगे। काम 31 दिसंबर तक पूरा होने का समय तय किया गया है।
जिला मजिस्ट्रेट अलंकृता पांडे ने पुष्टि की है कि ट्रैफिक नियम अब लागू कर दिए गए हैं। उत्तरी बिहार, कोसी और सीमांचल जाने वाले वाहनों को मुंगेर में श्री कृष्ण सेतु के रास्ते डायवर्ट किया गया है। इस बदलाव को संभालने के लिए एनएच-80 और चार लेन सड़क पर पांच प्रमुख जगहों पर 24 घंटे ट्रैफिक पुलिस के 30 जवान तैनात किए गए हैं।
यात्रियों की सुविधा के लिए गंगा नदी पर मुफ्त नाव सेवा शुरू की गई है, जो भागलपुर की तरफ बियाडा और बाबूपुर घाट को नौगछिया की तरफ जाह्नवी गंगा घाट से जोड़ती है। ये नावें यात्रियों, साइकिलों और मोटरसाइकिलों को बिना किसी शुल्क के ले जाएंगी और सभी यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। जिला मजिस्ट्रेट द्वारा बनाई गई छह सदस्यों की उच्च स्तरीय कमेटी वैकल्पिक रास्तों और जलमार्गों पर नजर रख रही है। साइट पर पोक्लेन, हाइड्रा और क्रेन जैसी भारी मशीनें लगाई गई हैं। 24 घंटे काम जारी रखने के लिए हाई-मास्ट सोलर और स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं। गूगल मैप्स ने वैकल्पिक रास्तों को दिखाने के लिए अपना नेविगेशन अपडेट कर दिया है, जिसमें 161 किलोमीटर का डायवर्जन शामिल है। मानसून के मौसम में रास्ते ठीक रहें, इसके लिए सर्विस रोड को गिट्टी और सीमेंट से मजबूत किया जा रहा है।