भागलपुर में विसहारी पूजा की धूम: 150 से ज्यादा मूर्तियों का विसर्जन, देखें पूरी खबर

भागलपुर में बुधवार, 19 अगस्त 2026 को तीन दिवसीय विसहारी (मनसा पूजा) का समापन हुआ, जिसके साथ ही पूरे जिले में मूर्ति विसर्जन की प्रक्रिया शुरू हो गई। इस अवसर पर भागलपुर के प्रमंडलीय आयुक्त प्रेम सिंह मीणा की घोषणा के अनुसार स्थानीय सार्वजनिक अवकाश रहा। शुरुआती रिपोर्टों में 150 से अधिक स्थानों पर स्थापना की बात कही गई थी, जबकि अधिकारियों ने पुष्टि की कि शहर भर में 116 से अधिक स्थानों पर भव्य प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं।
- 19 अगस्त को तीन दिवसीय विसहारी पूजा का समापन और विसर्जन शुरू।
- शहर के 116 से अधिक स्थानों पर स्थापित की गई थीं भव्य प्रतिमाएं।
- रेलवे स्टेशन चौक से शाम 4 बजे से शुरू हुए विसर्जन जुलूस।
- मुसहरी घाट, बरारी और चंपनला पुल को विसर्जन के लिए बनाया गया।
- प्रशासन ने सुरक्षा के लिए सीसीटीवी और SDRF की टीम तैनात की।
श्रद्धा और परंपरा का संगम
विसर्जन की प्रक्रिया बुधवार दोपहर से शुरू हो गई। शाम 4:00 बजे रेलवे स्टेशन चौक से जुलूस शुरू हुए, जिनमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। विसर्जन से पहले महिलाओं ने अपने परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए पारंपरिक 'खोइचा' चढ़ाकर पूजा की और फिर विदाई दी। विसर्जन के लिए मुसहरी घाट, बरारी और नाथनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत चंपनला पुल को निर्धारित स्थल बनाया गया था। मुसहरी घाट पर नगर निगम ने एक कृत्रिम तालाब तैयार किया था, जिसे साफ कर पानी से भरा गया था ताकि विसर्जन आसानी से हो सके।
सुरक्षा और प्रशासन के इंतजाम
कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त नियम लागू किए थे, जिसमें डीजे पर प्रतिबंध और अवैध पटाखों की दुकानों को बंद करना शामिल था। विसर्जन मार्गों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, जबकि नगर निगम ने घाटों पर रोशनी, टेंट और पीने के पानी की व्यवस्था की थी। सुरक्षा की निगरानी के लिए स्थानीय पुलिस, एसडीओ, एसडीपीओ और एसडीआरएफ (SDRF) के कर्मियों को तैनात किया गया था। बारिश, कीचड़ और पाइपलाइन बिछाने के निर्माण कार्य जैसी चुनौतियों के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ।
समिति और प्रशासन का समन्वय
केंद्रीय विसहारी पूजा समिति और स्थानीय प्रशासन के समन्वय से इस आयोजन को पूरा किया गया। मूर्तियों के विसर्जन को सुचारू बनाने के लिए नगर निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों की टीमें सुबह से ही घाटों पर तैनात थीं। 17 अगस्त से 19 अगस्त तक चलने वाला यह उत्सव विसर्जन रीति-रिवाजों के साथ समाप्त हुआ, जो देर रात तक जारी रहे।