भगालपुर: धूमधाम से विसर्जित हुईं विषहरी माता की मूर्तियां, नगर निगम ने किए पुख्ता इंतजाम

भगालपुर में 17 से 19 अगस्त 2026 तक चलने वाला तीन दिवसीय विषहरी पूजा उत्सव सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। बुधवार, 19 अगस्त को शहर में लगभग 116 मूर्तियों का औपचारिक विसर्जन किया गया।
• कुल 116 मूर्तियों का हुआ विसर्जन।
• नगर निगम ने घाटों पर रोशनी, पानी और सफाई की व्यवस्था की।
• सुरक्षा के लिए सीसीटीवी और पुलिस बल तैनात रहा।
• पारंपरिक रीति-रिवाजों और शस्त्र प्रदर्शन के साथ निकली विसर्जन यात्रा।
नगर निगम की सक्रियता और विसर्जन स्थल
भगालपुर नगर निगम ने विसर्जन घाटों पर जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित कीं, जिसमें लाइटिंग, पीने का पानी, टेंट और साफ-सफाई शामिल थी। मायागंज के मुसहरी घाट पर नगर निगम की टीम देर रात तक मौजूद रही और कृत्रिम तालाब से मूर्तियों के अवशेष हटाने का काम किया। इसके अलावा बरारी, नाथनगर थाना क्षेत्र के चंपनला पुल और मोहजीदपुर थाना क्षेत्र के छत्रपति तालाब को भी विसर्जन स्थल बनाया गया था।
सुरक्षा और पारंपरिक रस्में
जिला प्रशासन ने पूरी प्रक्रिया के दौरान कड़ी सुरक्षा रखी और सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी की गई। शहर में पुलिस बल तैनात रहा ताकि लोग सुरक्षित रहें। विसर्जन से पहले महिलाओं ने परिवार की समृद्धि के लिए देवी विषहरी को 'खोइचा' अर्पित करने की पारंपरिक रस्म निभाई। सेंट्रल विषहरी पूजा कमेटी के नेतृत्व में निकली विसर्जन यात्रा में युवाओं ने भाले और लाठी जैसे शस्त्रों के साथ पारंपरिक प्रदर्शन किया।
प्रमुख मांगें और शांति प्रार्थना
सेंट्रल कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष और प्रवक्ता प्रदीप कुमार ने इस उत्सव को राज्य मेले का दर्जा देने, राज्य अवकाश घोषित करने और चंपानगर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग की। प्रकाश चंद्र गुप्ता ने अंग क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को बचाने में सेंट्रल पूजा कमेटी की भूमिका की सराहना की। चंपानगर के प्राचीन मुख्य विषहरी मंदिर की मूर्ति विसर्जन के बाद मंदिर परिसर में शांति प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया।