भागलपुर: विसर्जन जुलूस में हथियारों पर रोक से बढ़ा तनाव, पुलिस ने संभाला मोर्चा

MyBhagalpur Team20 August 20262 min read59 viewsCity Local
भागलपुर: विसर्जन जुलूस में हथियारों पर रोक से बढ़ा तनाव, पुलिस ने संभाला मोर्चा

भागलपुर में बुधवार, 19 अगस्त 2026 को विसर्जन पूजा के जुलूस के दौरान हथियारों के प्रदर्शन पर रोक लगाने को लेकर तनाव पैदा हो गया। पुलिस ने सार्वजनिक जुलूसों में हथियार ले जाने पर पाबंदी लागू की, जिससे स्थिति तनावपूर्ण रही।

मुख्य बातें:

  • इशकचक पुलिस ने हथियार ले जाने पर रोक लगाई।
  • बिहार सरकार के 2023 के नियमों के तहत तलवार, लाठी और बंदूक प्रतिबंधित हैं।
  • गुरहट्टा चौक पर दो समूहों के बीच मूर्तियों की स्थिति को लेकर झड़प हुई।
  • कुल 116 मूर्तियों का विसर्जन सुरक्षा के बीच पूरा हुआ।

हथियारों के प्रदर्शन पर पुलिस की सख्ती

दोपहर के समय इशकचक थाने के अधिकारियों ने एक पूजा समिति के सदस्यों को रोका और उन्हें बताया कि सार्वजनिक जुलूसों में हथियार ले जाना गैरकानूनी है। समिति के सदस्यों ने पहले इस निर्देश का विरोध किया और कहा कि वे सालों से ऐसा करते आ रहे हैं। मामले को सुलझाने के लिए पुलिस ने भिखनपुर इलाके के कई प्रमुख बुद्धिजीवियों को थाने बुलाया ताकि उन्हें धार्मिक जुलूसों में हथियार दिखाने की कानूनी मनाही के बारे में समझाया जा सके।

बिहार सरकार और पुलिस के नियम

यह विवाद बिहार राज्य के उन नियमों के बीच हुआ, जिसके तहत नवंबर 2023 में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए जुलूसों में तलवार, लाठी और बंदूक दिखाने पर रोक लगाई गई थी। इसके अलावा, अगस्त 2026 में बिहार पुलिस मुख्यालय ने निर्देश दिया है कि AK-47, INSAS और SLR जैसे हाई-पावर्ड हथियार केवल आतंकवाद, नक्सलवाद और अपराधियों के खिलाफ अभियानों के लिए होंगे। भीड़ नियंत्रण या जुलूस ड्यूटी के दौरान इनका उपयोग नहीं किया जाएगा ताकि जनता में डर न फैले।

स्टंट और झड़प की घटनाएं

इन कोशिशों के बावजूद, स्टेशन चौक सहित रास्ते के कई हिस्सों में कुछ युवक भाले और लाठी जैसे पारंपरिक हथियारों से स्टंट करते हुए देखे गए। बुधवार शाम को गुरहट्टा चौक के पास दो अलग-अलग जुलूसों के बीच मूर्तियों की स्थिति को लेकर विवाद हो गया, जिसके बाद दोनों समूहों में हाथापाई हुई। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप कर विवाद को सुलझाया और जुलूस को आगे बढ़ाया।

सुरक्षा और निगरानी

भागलपुर प्रशासन सतर्क रहा और उकसाने वाली सामग्री और हुड़दंग को रोकने के लिए सोशल मीडिया की 24 घंटे निगरानी की गई। कड़ी सुरक्षा के बीच शहर के निर्धारित घाटों पर कुल 116 विसर्जन मूर्तियों को सफलतापूर्वक विसर्जित किया गया

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