भगत सिंह जयंती: भागलपुर के कला केंद्र में गूंजे क्रांतिकारी विचार, युवाओं ने लिया बड़ा संकल्प

भागलपुर के स्थानीय कला केंद्र में सोमवार को पीस सेंटर परिधि द्वारा शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस मौके पर एक संगोष्ठी का आयोजन हुआ जिसमें भगत सिंह के जीवन और उनके विचारों पर चर्चा की गई।
- पीस सेंटर परिधि ने कला केंद्र में मनाई भगत सिंह की जयंती।
- वक्ताओं ने भगत सिंह के क्रांतिकारी जीवन और दर्शन पर डाला प्रकाश।
- युवाओं को तर्क, विज्ञान और समानता की राह पर चलने की प्रेरणा दी गई।
समाजवाद और अंतिम व्यक्ति की चिंता
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीस सेंटर के संयोजक राहुल ने कहा कि भगत सिंह ने एक ऐसे स्वतंत्र भारत का सपना देखा था जहाँ नीतियाँ समाज के अंतिम व्यक्ति को ध्यान में रखकर बनाई जाएं। उन्होंने बताया कि भगत सिंह देश में समाजवाद की स्थापना करना चाहते थे।
कलाकारों और युवाओं के लिए प्रेरणा
संस्कृति कर्मी उदय ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि भगत सिंह का अध्ययन सिर्फ राजनेताओं के लिए ही नहीं, बल्कि कलाकारों, कवियों और नाटककारों के लिए भी बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि गांधी और भगत सिंह के विचारों में कोई विरोध नहीं था, बस दोनों के रास्ते अलग थे। वहीं मृदुला सिंह ने कहा कि बेहद कम उम्र में भगत सिंह ने देश को जो राह दिखाई, वह आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है।
तर्क, विज्ञान और शोषण से मुक्ति
दीपक कुमार मंडल और चन्दन कुमार ने भगत सिंह के दार्शनिक पहलुओं और उनके प्रसिद्ध लेख 'मैं नास्तिक क्यों हूँ' का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भगत सिंह युवाओं को धर्म, जाति और अंधविश्वास से ऊपर उठकर तर्क और विज्ञान के आधार पर सोचने के लिए प्रेरित करते थे। वे देश को न केवल अंग्रेजों से, बल्कि पूंजीपतियों और जमींदारों के शोषण से भी आजाद देखना चाहते थे।
बेहतर समाज गढ़ने का संकल्प
मोहम्मद बाकीर ने कहा कि उनके लिए देशभक्ति का मतलब हर नागरिक को शोषण से मुक्त कराना था। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने भगत सिंह के तर्कशीलता, न्याय, बराबरी और सम्मान के विचारों पर चलते हुए एक बेहतर समाज गढ़ने का संकल्प लिया।