बांका में भलजोर पुल खतरे में, भारी वाहनों की आवाजाही जारी

बांका और झारखंड को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे 133E पर बने भलजोर पुल की सुरक्षा को लेकर बड़ा खतरा पैदा हो गया है। पुल के पिलरों में दरारें आने के बाद भी इस पर से भारी वाहन और बसें लगातार गुजर रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों में किसी बड़े हादसे का डर सता रहा है।
इस खबर के मुख्य बिंदु:
- भलजोर पुल बिहार और झारखंड को जोड़ने वाला नेशनल हाईवे 133E का अहम हिस्सा है।
- पुल के पिलरों में दरारें मिलने के बाद भी भारी वाहनों का आना-जाना जारी है।
- प्रशासन द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स और बड़े पत्थर रातों-रात हटा दिए गए।
- पुल के दोनों सिरों पर लोहे के गर्डर एक हयवा ट्रक की टक्कर से टूट गए हैं जो 10 दिन से ठीक नहीं हुए हैं।
प्रशासनिक प्रयास और नाकामी
शुरुआत में अधिकारियों ने भारी ट्रैफिक को रोकने के लिए पुल के दोनों सिरों पर बैरिकेड लगाए थे। हालांकि, ये बैरिकेड लगाने के दो दिन के भीतर ही रातों-रात हटा दिए गए। इसके बाद प्रशासन ने रास्ते को बंद करने के लिए बड़े पत्थरों का इस्तेमाल किया, लेकिन वे प्रयास भी तब नाकाम साबित हुए जब पत्थरों को एक ही रात में हटा दिया गया, जिससे भारी वाहनों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई। इसके अलावा, पुल के दोनों सिरों पर लगे लोहे के गर्डर एक हयवा ट्रक की टक्कर से क्षतिग्रस्त हो गए हैं और स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार पुलिस कर्मियों की मौजूदगी के बावजूद ये लगभग 10 दिनों से वैसे ही बिना मरम्मत के पड़े हैं।
स्थानीय लोगों की मांग और चिंता
जिला मजिस्ट्रेट अंशुल अग्रवाल, विधायक पूरनलाल टुडू और संबंधित विभाग के अधिकारियों ने पहले ही इस जगह का निरीक्षण किया है। एक वैकल्पिक रास्ते के रूप में अभी डायवर्जन का निर्माण किया जा रहा है; हालांकि, जब तक यह डायवर्जन चालू नहीं हो जाता, तब तक स्थानीय लोगों का कहना है कि कड़े सुरक्षा उपाय करना बेहद जरूरी है। निवासी क्षतिग्रस्त गर्डरों और बैरियर की तुरंत मरम्मत करने, भारी वाहनों पर पूरी तरह रोक लगाने और चौबीस घंटे निगरानी रखने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया है कि पूरी तरह जोखिम की जानकारी होने के बावजूद अधिकारी किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों कर रहे हैं और यह मांग की है कि अगर पुल पर कोई आपदा आती है तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी होगी।