भागलपुर में 98 लाख का सैलरी घोटाला: अब HRMS सिस्टम में होंगे ये बड़े बदलाव

भागलपुर में 98 लाख के फर्जीवाड़े के बाद बिहार शिक्षा विभाग ने सैलरी भुगतान के लिए तीन स्तरीय वेरिफिकेशन और नए नियम लागू किए हैं।

Puja Singh6 November 20262 min read0 viewsCity Local
भागलपुर में 98 लाख का सैलरी घोटाला: अब HRMS सिस्टम में होंगे ये बड़े बदलाव

बिहार के शिक्षा विभाग ने भागलपुर में हुए एक बड़े वित्तीय घोटाले के बाद अपनी कमर कसी है। सुल्तानगंज ब्लॉक में 'तनुश्री' नाम की एक फर्जी शिक्षिका की आईडी बनाकर करीब 98.12 लाख रुपये की सरकारी राशि हड़पने के मामले ने विभाग को हिला कर रख दिया। इस गंभीर धोखाधड़ी को देखते हुए अब मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (HRMS) के जरिए होने वाले सैलरी भुगतान के नियमों को पूरी तरह बदल दिया गया है ताकि भविष्य में ऐसी चोरी दोबारा न हो सके।

इस पूरे फर्जीवाड़े में लापरवाही बरतने के आरोप में तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) चंदन कुमार और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) शशि चंदन चौधरी को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, इस साजिश में शामिल ऑपरेटर अविनाश राज और अन्य दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

सैलरी भुगतान के लिए अब लागू होगा थ्री-टियर वेरिफिकेशन

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शिक्षा विभाग ने अब सैलरी भुगतान की प्रक्रिया को बेहद सख्त कर दिया है। अब किसी भी शिक्षक की सैलरी तब तक जारी नहीं होगी, जब तक कि तीन स्तरों पर उसका सत्यापन (Three-tier verification) नहीं हो जाता। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब बिना जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) की सीधी मंजूरी के वेतन का भुगतान संभव नहीं होगा।

सिस्टम में पारदर्शिता लाने के लिए विभाग ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:

  • सैलरी प्रोसेसिंग की जिम्मेदारी अब ब्लॉक शिक्षा कार्यालयों से हटाकर नामित मिडिल स्कूल के हेडमास्टर्स को सौंपी गई है।
  • सभी शिक्षकों का एक सेंट्रलाइज्ड मास्टर डेटा तैयार किया जा रहा है, जिससे निगरानी आसान होगी।
  • सभी जिलों को अपने पेरोल सिस्टम का तत्काल ऑडिट करने और किसी भी फर्जी या डुप्लीकेट आईडी को ब्लॉक करने का निर्देश दिया गया है।
  • नई आईडी बनाने, पुराने प्रोफाइल को दोबारा सक्रिय करने या रिकॉर्ड में बदलाव करने पर अब हर महीने उनकी समीक्षा की जाएगी।

विभाग ने सभी जिला कार्यालयों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे HRMS सैलरी भुगतान के संबंध में अपनी अनुपालन रिपोर्ट सात दिनों के भीतर मुख्यालय को सौंपें। इस कदम से यह उम्मीद की जा रही है कि सरकारी खजाने की लूट पर लगाम लगेगी और केवल पात्र शिक्षकों को ही वेतन मिलेगा।

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