Bihar Govt News: बिहार के 6 बड़े अस्पतालों में खुले हीमोफीलिया और थैलेसीमिया डे-केयर सेंटर, अब मरीजों को मिलेगा मुफ्त इलाज

Pooja Kanjani2 April 20262 min read33 viewsCity Local
Bihar Govt News: बिहार के 6 बड़े अस्पतालों में खुले हीमोफीलिया और थैलेसीमिया डे-केयर सेंटर, अब मरीजों को मिलेगा मुफ्त इलाज

बिहार के हीमोफीलिया और थैलेसीमिया के मरीजों के लिए राहत भरी खबर है. राज्य सरकार ने पीएमसीएच पटना, एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर और जेएलएनएमसीएच भागलपुर सहित छह प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में मुफ्त डे-केयर सेंटर की सुविधा शुरू कर दी है. इन केंद्रों पर मरीजों को बिना किसी शुल्क के जरूरी दवाएं और इलाज की सुविधाएं मिल रही हैं, जिससे अब आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को निजी अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे.

इन केंद्रों पर मरीजों को कौन सी सुविधाएं मुफ्त मिलेंगी?

इन डे-केयर केंद्रों पर मरीजों के लिए कई महत्वपूर्ण चिकित्सा सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध कराई गई हैं. मरीजों को नियमित रूप से रक्त जांच और मुफ्त ब्लड ट्रांसफ्यूजन की सुविधा दी जा रही है. इसके अलावा हीमोफीलिया के मरीजों के लिए जरूरी फैक्टर थेरेपी और थैलेसीमिया के लिए आयरन चीलेशन थेरेपी भी यहां उपलब्ध है. सरकार ने दवा वितरण की विशेष व्यवस्था की है ताकि मरीजों को नियमित अंतराल पर उपचार मिल सके. एम्स पटना और जीएमसी पूर्णिया जैसे अस्पतालों में विशेष बेड और साप्ताहिक क्लीनिक की भी शुरुआत की गई है.

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बिहार के किन अस्पतालों में मिलेगी यह सुविधा और क्या है सरकारी योजना?

बिहार सरकार ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में इन केंद्रों को स्थापित किया है ताकि मरीजों को अपने पास के जिले में ही इलाज मिल सके. नीचे दी गई सूची में उन प्रमुख अस्पतालों के नाम और वहां की स्थिति दी गई है:

अस्पताल का नाम शहर विशेष व्यवस्था
PMCH पटना इंटीग्रेटेड सेंटर फॉर हीमोग्लोबिनोपैथीज
JLNMCH (मायागंज) भागलपुर थैलेसीमिया डे-केयर सेंटर
AIIMS पटना क्लीनिकल हेमेटोलॉजी और डे-केयर
SKMCH मुजफ्फरपुर डे-केयर और फैक्टर थेरेपी
ANMCH गया बच्चों के लिए भोजन और मनोरंजन
GMC पूर्णिया 20 बेड की विशेष सुविधा

इसके साथ ही बिहार सरकार 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए ‘मुख्यमंत्री बाल थैलेसीमिया योजना’ चला रही है. इस योजना के तहत तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित CMC में बच्चों का मुफ्त बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराया जाता है. सरकार प्रति मरीज लगभग 15 लाख रुपये खर्च करती है, जिसमें रहने और इलाज का पूरा खर्चा शामिल होता है. अब तक कई बच्चों का इस योजना के जरिए सफल ऑपरेशन हो चुका है.

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