बिना फंड स्कूल मरम्मत का दबाव, भागलपुर में बिहार शिक्षक संघ ने खोला मोर्चा
भागलपुर में बिना फंड के स्कूल मरम्मत और मिड-डे मील के पैसों में देरी को लेकर बिहार शिक्षक संघ ने शिक्षा विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

भागलपुर जिले में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर अब विवाद गहरा गया है। बिहार शिक्षक संघ ने विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की है। संघ का कहना है कि शिक्षा विभाग बिना किसी बजट या फंड के स्कूलों में रंग-रोगन और मरम्मत का काम पूरा करने के लिए हेडमास्टरों पर दबाव बना रहा है, जो पूरी तरह से अनुचित है।
शिक्षक संघ के राज्य सचिव मनोज कुमार ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि 'कायाकल्प अभियान' के तहत स्कूलों के नवीनीकरण का आदेश तो दे दिया गया है, लेकिन इसके लिए जरूरी पैसा उपलब्ध नहीं कराया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए तो बाहरी एजेंसियों का चयन करता है और उन्हें भुगतान भी करता है, लेकिन जब स्कूल स्तर के छोटे कार्यों की बात आती है, तो हेडमास्टरों को बिना वित्तीय सहायता के सब कुछ मैनेज करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इससे शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
मिड-डे मील फंड में देरी और वेतन का संकट
मामला सिर्फ मरम्मत तक सीमित नहीं है, बल्कि मिड-डे मील (MDM) की स्थिति और भी चिंताजनक है। शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष और हेडमास्टर सुमन कुमार ने खुलासा किया कि जिले के स्कूलों को पिछले करीब सात महीनों से मिड-डे मील के लिए फंड नहीं मिला है।
- जेब से खर्च: फंड न मिलने के कारण हेडमास्टर बच्चों के भोजन की व्यवस्था के लिए अपनी जेब से पैसे खर्च कर रहे हैं।
- वित्तीय संकट: लंबे समय से फंड लंबित होने के कारण शिक्षकों में भारी आर्थिक तनाव है।
- वेतन में देरी: त्योहारों के सीजन में अक्टूबर महीने का वेतन समय पर न मिलने को संघ ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।
शिक्षक संघ ने पुरजोर मांग की है कि शिक्षा विभाग तुरंत कायाकल्प अभियान के तहत मरम्मत कार्यों का फंड जारी करे और मिड-डे मील की लंबित राशि का भुगतान करे, ताकि हेडमास्टरों को अपनी व्यक्तिगत जमा पूंजी खर्च न करनी पड़े और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण भोजन मिलता रहे।