भागलपुर: बिहारपुर में 250 साल पुरानी वाम काली पूजा की परंपरा शुरू, उमड़ी भीड़
भागलपुर के बिहारपुर में 250 वर्षों से चली आ रही वाम काली पूजा की परंपरा शुरू हो गई है। जानें इस अनोखी पूजा और इसके इतिहास के बारे में।

भागलपुर जिले के नौगछिया subdivision अंतर्गत बिहारपुर-जमालपुर पंचायत में आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। यहाँ की ऐतिहासिक बिहारपुर वाम काली पूजा की शुरुआत हो चुकी है, जो पिछले 250 वर्षों से निरंतर चली आ रही है। दीप प्रज्वलन के साथ इस उत्सव का आगाज हुआ, जिसके बाद आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों और नाटकों ने स्थानीय लोगों का मन मोह लिया और बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ एकत्रित हुए।
यह पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि बिहारपुर के सांस्कृतिक इतिहास का एक अभिन्न हिस्सा है। यहाँ की पूजा विशेष तांत्रिक परंपराओं के अनुसार की जाती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, दिवाली की आधी रात को जब देवी को वेदी पर स्थापित किया जाता है, तभी से औपचारिक पूजा और उससे जुड़े मेले की शुरुआत मानी जाती है।
पौराणिक कथा और आस्था का केंद्र
इस मंदिर के उद्गम को लेकर एक स्थानीय लोककथा प्रचलित है, जो बदुर तांती नामक एक गरीब व्यक्ति के परिवार से जुड़ी हुई है। श्रद्धालुओं की अटूट आस्था इस मंदिर में साफ झलकती है; मान्यता है कि यहाँ मांगी गई मन्नतें पूरी होती हैं, जिसके बाद भक्त बलि या मुंडन जैसे संकल्प पूरे करते हैं।
इस अवसर पर बीजेपी नेता और महंत नवल किशोर दास, पूजा समिति के अध्यक्ष गौरव शर्मा, रामदीप मंडल, अशोक कुमार गोस्वामी, धीरेंद्र जी और कुणाल उर्फ भानु झा सहित सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
उत्सव के आगामी कार्यक्रमों की बात करें तो 8 नवंबर 2026 को शाम 5:30 बजे एक भव्य महाआरती का आयोजन किया जाएगा, जिसके बाद रात भर पारंपरिक पूजा अनुष्ठान चलेंगे। इस पूरे आयोजन का समापन 9 नवंबर को होगा, जब मूर्ति विसर्जन के लिए थाना घाट सरोवर तक एक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी।