बियाडा घाट पर यात्रियों को मिलेगी राहत, प्रशासन ने स्टीमर एजेंसियों के लिए तय किए जेट्टी

विक्रमशिला सेतु बंद होने के कारण भागलपुर और नौगचिया के बीच बियाडा घाट की स्टीमर सेवा एक महत्वपूर्ण जीवनरेखा बनी हुई है। गंगा के जलस्तर में गिरावट आने से यहाँ संचालन में भारी दिक्कतें आ रही हैं।
• गंगा का जलस्तर घटने से किनारे पर कीचड़ और गाद जमा हो गई है।
• स्टीमर सीधे किनारे पर नहीं लग पा रहे हैं।
• बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को नाव तक पहुँचने के लिए घुटनों तक कीचड़ और पानी से गुजरना पड़ रहा है।
• प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए नया ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया है।
• तीनों निजी स्टीमर एजेंसियों को अलग-अलग जेट्टी आवंटित की गई हैं।
रैंप निर्माण की जिम्मेदारी एजेंसियों पर
प्रशासन के नए निर्देशों के अनुसार, यात्रियों के लिए रैंप बनाने और उनके रखरखाव की जिम्मेदारी निजी एजेंसियों की होगी। जिला प्रशासन निर्माण के लिए जरूरी ईंट और मिट्टी उपलब्ध कराएगा। हालांकि, कीचड़ हटाने और मजबूत रैंप बनाने के लिए पोकलेन जैसी भारी मशीनों का इंतजाम एजेंसियों को खुद करना होगा।
सेवाएं चालू रखने का सख्त निर्देश
अधिकारियों ने एजेंसियों को सख्त निर्देश दिया है कि स्टीमर सेवा बिना किसी रुकावट के चालू रहनी चाहिए। यह रूट सरकारी कर्मचारियों, छात्रों, छोटे व्यापारियों और मरीजों सहित हजारों दैनिक यात्रियों के लिए एकमात्र संपर्क मार्ग है। काम की समय पर समाप्ति सुनिश्चित करने के लिए जिला अधिकारियों को घाट पर तैनात रहने का निर्देश दिया गया है।
सुरक्षा की चुनौती
प्रशासन के सामने यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है। अनियंत्रित भीड़ और नदी की बदलती स्थितियों को देखते हुए, संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए नए रैंप और जेट्टी व्यवस्था को तुरंत और प्रभावी ढंग से लागू करना जरूरी है।