लखीसराय में बाढ़ का कहर, सीपीआई ने की राहत और बचाव कार्य की मांग

लखीसराय से मनीष की रिपोर्ट के अनुसार, बड़हिया, पिपरिया और लखीसराय अंचल की विभिन्न पंचायतों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। बाढ़ के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और मवेशियों के लिए चारे तथा सुरक्षित आश्रय की भारी कमी हो गई है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी यानी सीपीआई ने जिला प्रशासन से युद्ध स्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू करने की मांग की है। पार्टी की रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ के पानी से हरा चारा पूरी तरह नष्ट हो गया है और सूखा चारा भी डूब गया है, जिससे पशुपालकों का संकट बढ़ गया है।
मवेशियों और परिवारों के सामने संकट
कई बाढ़ पीड़ित परिवार अपने मवेशियों के साथ ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। इन जगहों पर चारे, पशु चिकित्सा सुविधाओं और अन्य जरूरी चीजों की कमी है, जिससे पशुपालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सीपीआई ने चेतावनी दी है कि यदि समय पर मदद नहीं मिली, तो बड़ी संख्या में मवेशियों की जान जा सकती है।
पार्टी ने प्रशासन से तुरंत पर्याप्त मात्रा में हरा और सूखा चारा उपलब्ध कराने, प्रभावित इलाकों में पर्याप्त नावें लगाने और पशु चिकित्सा दल तैनात करने की मांग की है। इसके अलावा, सीपीआई ने जरूरी दवाओं और अन्य राहत सामग्री बांटने की भी मांग की है।
स्थानीय विधायक पर गंभीर आरोप
सीपीआई ने स्थानीय विधायक और उनके समर्थकों के कथित आचरण की निंदा की है, और आपदा के दौरान राजनीतिक लाभ के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया है। पार्टी का आरोप है कि जनता की वास्तविक समस्याओं को हल करने के बजाय सरकारी परियोजनाओं पर ध्यान न देना संकट के समय असंवेदनशील रवैये को दर्शाता है।
अंत में, पार्टी ने जिला प्रशासन से अपील की है कि वे राजनीतिक दबाव से मुक्त रहें और बाढ़ से प्रभावित नागरिकों तथा मवेशियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाएं और सुनिश्चित करें कि मदद तुरंत सभी जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे।