भागलपुर और देवरिया क्षेत्रों में शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बहुत श्रद्धा और आस्था के साथ दरिया बेड़ा पर्व मनाया। इस पर्व में मेल और आसपास के कई गांवों के लोग शामिल हुए। यह त्योहार नदियों और जल स्रोतों के रक्षक माने जाने वाले हजरत खिज्र अलैहिस्सलाम की याद में मनाया जाता है। लोग नदियों, तालाबों और पोखरों के तट पर इकट्ठा हुए और नियाज-फातिहा पढ़ी तथा देश व समाज के लिए दुआ मांगी।
इस पर्व की खास बातें इस प्रकार हैं: - शुक्रवार को भागलपुर और देवरिया क्षेत्र में मनाया गया दरिया बेड़ा पर्व। - महिलाओं ने रखा दिनभर का व्रत और घरों में बनाई कई तरह की मिठाइयां और शीरनी। - जल स्रोतों के पास पहुंचकर लोगों ने हजरत खिज्र अलैहिस्सलाम के नाम पर फातिहा पढ़ी। - बच्चों और युवाओं ने कागज और केले के तने से बनाई छोटी-बड़ी नावें और पानी में तैराईं।
महिलाओं ने इस दिन व्रत रखा और घर पर विभिन्न प्रकार के पकवान, शीरनी और नियाज तैयार किए। मगरिब की नमाज के बाद पुरुष और महिलाएं जल स्रोतों के पास पहुंचे और हजरत खिज्र अलैहिस्सलाम के नाम पर फातिहा पढ़ी। इसके बाद नियाज बांटी गई और व्रत रखने वालों ने देश, सामाजिक सद्भाव, भाईचारे और समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हुए अपना व्रत तोड़ा।
मौलाना अकबर Hafiz ने बताया कि यह त्योहार हमारे पूर्वजों की पुरानी परंपरा के अनुसार मनाया जाता है। इसके तहत बच्चों और युवाओं ने कागज, केले के तने और अन्य सामग्रियों से छोटी और बड़ी नावें बनाईं। इन नावों को सजाकर पानी के स्रोतों में तैराया गया। कई लोगों ने अपनी मन्नतें पूरी होने की उम्मीद में और मन्नत पूरी होने के बाद आभार व्यक्त करने के लिए इन नावों को पानी में तैराया। जल स्रोतों के पास दिनभर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की भारी भीड़ रही। यह त्योहार पूरी शांति के साथ संपन्न हुआ और सभी ने अपनी सांस्कृतिक विरासत तथा पारंपरिक रिवाजों को बनाए रखने पर जोर दिया।