भागलपुर में अगस्त्य तर्पण के साथ पितृ पक्ष की शुरुआत हो चुकी है। इसकी वजह से बूढ़ानाथ मंदिर समेत शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। बूढ़ानाथ मंदिर के ठीक सामने दो श्राद्ध भवन बने हुए हैं। इनमें से एक का संचालन मारवाड़ी समाज और दूसरे का संचालन बिहारी समुदाय द्वारा किया जाता है।
बिहारी समुदाय का श्राद्ध भवन इस समय बहुत ही जर्जर हालत में है। इस भवन की छत इतनी खस्ताहाल है कि अधिकारियों को डर है कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
बरसात के दौरान इस इमारत के अंदर लगातार पानी टपकता रहता है। इस ढांचे पर साल 1965 का एक शिलान्यास पत्थर भी लगा हुआ है। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, इस जगह पर क्रिया-कर्म और श्राद्ध करने की परंपरा करीब 150 साल पुरानी है। पितृ पक्ष के दौरान यहां आने वाले लोगों की भारी भीड़ को देखते हुए, इस इमारत की जर्जर स्थिति चिंता का एक बड़ा विषय बन गई है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि पहले छत पर एक पेड़ उग आया था, जो एक आंधी के दौरान गिर गया। इससे छत और पूरे ढांचे की मजबूती को और ज्यादा नुकसान पहुंचा। बारिश के मौसम में पूरे भवन में पानी रिसता रहता है। स्थानीय लोगों और पुजारियों का कहना है कि इस सुविधा की देखरेख के लिए जिम्मेदार लोगों ने जरूरी मरम्मत का काम नहीं कराया है। चिंतित नागरिक अब पितृ पक्ष के दौरान अनुष्ठान करने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तुरंत मरम्मत और नियमित रखरखाव की मांग कर रहे हैं।