इन्द्रधनुष साहित्य परिषद ने फारबिसगंज के प्रोफेसर कॉलोनी स्थित पीडब्ल्यूडी परिसर में प्रसिद्ध हिंदी आलोचक डॉ. रामविलास शर्मा की जयंती पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता बाल साहित्यकार हेमंत यादव ने की और मुख्य अतिथि के रूप में संवदिया के प्रधान संपादक मगन मिश्रा मार्तंड शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत में सभी उपस्थित लोगों और साहित्य प्रेमियों ने डॉ. रामविलास शर्मा की तस्वीर पर फूल चढ़ाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
पूर्व बीईओ प्रमोद कुमार झा, पूर्व प्राचार्य हरिशंकर झा, पूर्व प्रधानाध्यापक हर्ष नारायण दास, हिंदी विद्वान अरविंद ठाकुर, प्रधानाध्यापक दिवाकर कुमार और परिषद के सचिव विनोद कुमार Tiwari समेत कई वक्ताओं ने डॉ. शर्मा के जीवन और उनके साहित्य में योगदान के बारे में विस्तार से बातचीत की। वक्ताओं ने बताया कि वे आधुनिक हिंदी साहित्य के एक बहुत बड़े मार्क्सवादी आलोचक, निबंधकार, कवि, विचारक और भाषाविद थे। अंग्रेजी के प्रोफेसर होने के बावजूद हिंदी साहित्य के प्रति उनका समर्पण और भारतीय संस्कृति, भाषा, इतिहास तथा सामाजिक सोच की गहरी समझ उन्हें दूसरों से अलग बनाती थी। उनका ज्ञान ऋग्वेद से लेकर मार्क्सवादी विचारधारा तक बहुत व्यापक था।
वक्ताओं ने यह भी बताया कि डॉ. शर्मा को अपने जीवनकाल में साहित्य अकादमी पुरस्कार, भारत भारती, शलाका सम्मान, व्यास सम्मान और शताब्दी सम्मान जैसे कई बड़े पुरस्कार मिले।
उन्होंने अपने पूरे करियर में साहित्यिक रचना और वैचारिक लेखन का काम जारी रखा और लगभग 50 महत्वपूर्ण किताबें लिखीं। इस कार्यक्रम में सुनील दास, पलकधारी मंडल, शिवशंकर तिवारी और सीताराम बिहारी जैसे अन्य लोग भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के अंत में फारबिसगंज कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष और साहित्यकार प्रोफेसर तारकेश्वर मिश्रा के निधन पर एक शोक सभा रखी गई।
सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और उनके निधन पर गहरा दुख जताया।