कटिहार पुलिस सेंटर में फर्जी पुलिसकर्मी की एंट्री, डायल-112 ड्राइवर बनकर कर रहा था निवास

कटिहार पुलिस सेंटर में फर्जी पुलिसकर्मी बनकर रह रहे दीपक कुमार को गिरफ्तार किया गया है। उसके पास से वर्दी और फर्जी आईडी कार्ड बरामद हुआ है।

Banibrata Chakraborty5 November 20262 min read0 viewsSad/Bad
कटिहार पुलिस सेंटर में फर्जी पुलिसकर्मी की एंट्री, डायल-112 ड्राइवर बनकर कर रहा था निवास

बिहार के कटिहार से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शख्स ने पुलिस की वर्दी पहनकर और फर्जी पहचान बताकर पुलिस सेंटर के भीतर ही डेरा डाल लिया। यह व्यक्ति खुद को डायल-112 का ड्राइवर और स्पेशल ऑक्जिलरी पुलिस (SAP) का जवान बता रहा था, लेकिन उसकी पोल तब खुली जब एक सतर्क पुलिसकर्मी को उसकी गतिविधियों पर शक हुआ।

घटना की जानकारी देते हुए एसपी परिचय कुमार ने बताया कि आरोपी व्यक्ति पुलिस सेंटर के कॉन्स्टेबल बैरक नंबर 100 में रह रहा था। वहां तैनात कॉन्स्टेबल सुनील कुमार महतो को इस व्यक्ति के काम करने के तरीके और उसकी पहचान पर संदेह हुआ, जिसके बाद उन्होंने तुरंत ट्रांसपोर्ट ब्रांच और सार्जेंट को इसकी सूचना दी। जब अधिकारियों ने इस व्यक्ति की तलाशी ली, तो उनके होश उड़ गए।

तलाशी में मिली वर्दी और फर्जी आईडी

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पुलिस की जांच में आरोपी के पास से पुलिस की वर्दी, जूते, एक फर्जी पहचान पत्र, मोबाइल फोन और वर्दी पहने हुए उसकी दो तस्वीरें बरामद हुईं। जब रिकॉर्ड्स खंगाले गए, तो पता चला कि वह व्यक्ति न तो डायल-112 सेवा का ड्राइवर है और न ही किसी हाईवे पेट्रोलिंग यूनिट में तैनात है। वह सिर्फ फर्जी पहचान के सहारे पुलिस परिसर में रह रहा था।

पकड़े गए आरोपी की पहचान सहरसा जिले के देझर थाना क्षेत्र के बरहडा निवासी दीपक कुमार (उर्फ दिलखुश कुमार) के रूप में हुई है, जो नंदकिशोर प्रसाद यादव का पुत्र है। पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि वह पुलिस सेंटर जैसे संवेदनशील इलाके में क्या मकसद लेकर आया था। आशंका जताई जा रही है कि वह पुलिस शस्त्रागार (Armoury) और रिजर्व ऑफिस जैसे महत्वपूर्ण स्थानों की रेकी कर रहा था।

इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए सहायक थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। एसपी ने यह भी स्पष्ट किया है कि पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी को फर्जी वर्दी और आईडी कार्ड किसने उपलब्ध कराए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस साजिश के पीछे कोई बड़ा गिरोह तो नहीं है।

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