भागलपुर के नवगछिया अनुमंडल में गंगा और कोसी नदियों के जलस्तर में मंगलवार सुबह हल्की गिरावट दर्ज की गई और पानी की बहाव गति धीमी हुई। हालांकि आंशिक कमी के बावजूद तटबंधों पर दबाव अब भी गंभीर बना हुआ है और राघोपुर, इस्माइलपुर-बिंदटोली, मद्रौनी तथा चोरहर तटबंधों के 'टो' (आधार) को पानी लगातार छू रहा है। इस्माइलपुर-बिंदटोली में गंगा अभी भी खतरे के निशान से 35 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। राघोपुर में शेष बचे तटबंध और रेलवे लाइन की सुरक्षा के लिए जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ इंजीनियरों की देखरेख में बाढ़ से मुकाबले का काम जारी है।
राघोपुर क्षेत्र में स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। सुबह 6:00 बजे गंगा का जलस्तर 32.85 मीटर दर्ज किया गया, जो 32.68 मीटर के चेतावनी स्तर से 17 सेंटीमीटर ऊपर है। पिछले 12 घंटों में 5 सेंटीमीटर की गिरावट आई है, लेकिन धारा अभी भी सीधे तटबंध के आधार पर टकरा रही है। रेलवे ट्रैक और तटबंध की सुरक्षा के लिए दो सेवानिवृत्त विशेषज्ञ इंजीनियरों, बाढ़ प्रतिरोधक बल के अध्यक्ष और इंजीनियर-इन-चीफ की मौजूदगी में दिन-रात बोल्डर और जियो-बैग पिचिंग का काम किया जा रहा है।
इस्माइलपुर-बिंदटोली में स्पर नंबर-7 बेहद संवेदनशील बना हुआ है। जलस्तर 31.95 मीटर दर्ज किया गया। 2 सेंटीमीटर की गिरावट के बावजूद यह 31.60 मीटर के खतरे के निशान से 35 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है। पानी के तटबंध के निचले हिस्सों तक पहुंचने के साथ ही विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है और गश्त दल चौबीस घंटे स्थल की निगरानी कर रहे हैं।
चारों संवेदनशील स्थलों के लिए तुलनात्मक जलस्तर डेटा इस प्रकार है: - राघोपुर (गंगा): 32.85 मीटर (चेतावनी स्तर 32.68 मीटर, चेतावनी स्तर से 17 सेंटीमीटर ऊपर)। - इस्माइलपुर-बिंदटोली (गंगा): 31.95 मीटर (खतरा निशान 31.60 मीटर, खतरा निशान से 35 सेंटीमीटर ऊपर)। - मद्रौनी (कोसी): 31.12 मीटर (चेतावनी स्तर 30.48 मीटर, खतरा निशान 31.48 मीटर, चेतावनी स्तर से 64 सेंटीमीटर ऊपर और खतरा निशान से 36 सेंटीमीटर नीचे)। - चोरहर (कोसी): 31.32 मीटर (खतरा निशान 31.77 मीटर, खतरा निशान से 45 सेंटीमीटर नीचे, और टो-टचिंग जारी)।
हालांकि जल संसाधन विभाग वर्तमान में चोरहर और मद्रौनी तटबंधों को सुरक्षित और नियंत्रण में बताता है, लेकिन नागपरा तटबंध और बागमती जमींदारी बांध पर दबाव बना हुआ है और कोसी का पानी कई जगहों पर आधार का कटाव कर रहा है। तकनीकी विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जैसे-जैसे जलस्तर कम होता है, तटबंध के टूटने का जोखिम बढ़ जाता है और मौजूदा सुरक्षा प्रयासों में ढील देना अभी जल्दबाजी होगी।