भागलपुर के नौगछिया में गंगा का कहर, 30 साल पुराना दुर्गा मंदिर नदी में समाया

MyBhagalpur Team1 September 20262 min read42 viewsSad/Bad
भागलपुर के नौगछिया में गंगा का कहर, 30 साल पुराना दुर्गा मंदिर नदी में समाया

भागलपुर के नौगछिया के खरीक प्रखंड में गंगा नदी की भीषण कटाव से स्थिति गंभीर हो गई है। इस खबर के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं: - गंगा नदी के कटाव से राघोपुर-नर्कटिया तटबंध क्षतिग्रस्त हो गया है। - नर्कटिया बांध का 'एन नोज' पूरी तरह डूब गया है। - पुराने शंकरपुर रेलवे लाइन के पास स्थित करीब 30 साल पुराना दुर्गा मंदिर नदी में विलीन हो गया है। - डीएम अलंकृता पांडे और एसपी वैभव शर्मा मौके पर कैंप कर रहे हैं।

तटबंधों को बचाने के लिए जद्दोजहद

भागलपुर के नौगछिया के खरीक प्रखंड में गंगा नदी की भीषण कटाव लगातार तेज हो रही है। चल रहे कटाव रोधी कार्यों के बावजूद, नदी ने राघोपुर-नर्कटिया तटबंध को काफी नुकसान पहुंचाया है और नर्कटिया बांध का 'एन नोज' अब पूरी तरह से डूब गया है। इसके अलावा, पुराने शंकरपुर रेलवे लाइन के पास स्थित लगभग 30 साल पुराना दुर्गा मंदिर नदी में खो गया है। मंदिर के नष्ट होने से पुराने रेलवे लाइन तटबंध की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

प्रशासन की मौजूदगी और राहत कार्य

तटबंधों की रक्षा के लिए प्रशासन और जल संसाधन विभाग द्वारा बाढ़ से लड़ने के काम में तेजी लाई गई थी, लेकिन साथ ही नदी का बहाव बढ़ गया, जिससे मंदिर तेजी से ढह गया। भागलपुर की जिलाधिकारी अलंकृता पांडे और नौगछिया के पुलिस अधीक्षक वैभव शर्मा वर्तमान में स्थिति की निगरानी के लिए मौके पर कैंप कर रहे हैं। अधिकारी सक्रिय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों को खाली करा रहे हैं और निवासियों से सुरक्षित स्थानों पर जाने का आग्रह कर रहे हैं, जबकि शेष तटबंध की रक्षा के लिए गहन प्रयास जारी हैं।

गंगा के बहाव को मोड़ने की योजना

जिलाधिकारी अलंकृता पांडे ने बताया कि गंगा को उसके पुराने रास्ते पर वापस मोड़ने के लिए नदी के मूल प्रवाह पथ की ड्रेजिंग की योजना विकसित की जा रही है। इस रणनीति का उद्देश्य मौजूदा तटबंध पर वर्तमान में पड़ रहे दबाव को कम करना है। दीर्घकालिक गाद जमा होने को हटाने के संबंध में आगे के फैसले सरकार स्तर पर लंबित हैं।

ग्रामीणों की चिंता और प्रशासनिक कदम

पुराने शंकरपुर रेलवे लाइन तटबंध पर खतरा बढ़ने से स्थानीय निवासियों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। हालांकि इस क्षेत्र में कटाव ऐतिहासिक रूप से एक चुनौती रहा है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि नदी के किनारे कटने की मौजूदा दर अभूतपूर्व है। प्रशासनिक टीमें मौके पर मौजूद हैं और आगे के बुनियादी ढांचे के नुकसान को रोकने के लिए संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षात्मक उपाय कर रही हैं।

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