भागलपुर में गंगा का कटाव खतरनाक, जमींदारी बांध बचाने भागे लोग

भागलपुर के राघोपुर पंचायत के छोटी अलालपुर गांव में गंगा नदी का भीषण कटाव शुरू हो गया है, जिससे एक जरूरी जमींदारी बांध का अस्तित्व खतरे में आ गया है। 4 सितंबर 2026 तक स्थानीय लोग अपने घरों को छोड़कर ऊंचे स्थानों की ओर भाग रहे हैं और इस संकट को 2008 की भयंकर बाढ़ से भी बदतर बता रहे हैं। इस कटाव की वजह से 100 साल पुराना चेती दुर्गा मंदिर नदी में समा चुका है, और अधिकारियों को ऐतिहासिक थाना बिहपुर-महेशपुर रेलवे खंड तथा विक्रमशिला सेतु के अप्रोच पथ के नष्ट होने का भी डर सता रहा है।
बिहार के उपमुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी दिल्ली में चल रही बैठक बीच में ही छोड़कर पटना लौट आए हैं ताकि इस आपात स्थिति का जायजा ले सकें। जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह भी राहत और कटाव रोकने के उपायों की निगरानी करने के लिए इस जगह का दौरा करने वाले हैं। विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ और मुख्य इंजीनियर समेत एक तकनीकी टीम पहले से ही इस जगह पर मौजूद है। भागलपुर की जिलाधिकारी अलंकारिता पांडे और नवगछिया के एसपी वैभव शर्मा भी स्थिति पर नजर रखने के लिए वहीं कैंप कर रहे हैं।
प्रशासनिक कदम और राहत कार्य
नदी के बहाव को मोड़ने के लिए अधिकारी भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण की ड्रेजिंग मशीनों को लगाने की तैयारी कर रहे हैं। गंगा के तीन अतिरिक्त चैनल बनाने की योजना पर काम चल रहा है जो बरारी में मुख्य धारा से जुड़ेंगे। सुरक्षा और बचाव के काम के लिए राज्य आपदा मोचन बल की तैनाती कर दी गई है। लाखों रुपये खर्च करके चलाए जा रहे बाढ़ से निपटने के अभियानों के बावजूद नदी का तेज बहाव सरकारी कोशिशों के सामने लगातार चुनौती बना हुआ है।
यह इलाका प्रशासन के लिए खास चिंता का विषय बन गया है क्योंकि इस प्रभावित क्षेत्र में ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार (बुलो मंडल) और सड़क निर्माण मंत्री ई. कुमार शैलेंद्र के पैतृक आवास और निर्वाचन क्षेत्र आते हैं। 4 सितंबर को भागलपुर में भारी बारिश और आंधी-तूफान के पूर्वानुमान के बाद अधिकारी पूरी तरह हाई अलर्ट पर हैं।