भागलपुर जिले के रघुपुर पंचायत में गंगा नदी के भीषण कटाव से कई घर बर्बाद हो गए हैं और छोटी अलालपुर तथा शंकरपुर इलाकों में 120 फीट गहरे गड्ढे बन गए हैं। रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को सचिदानंद मंडल का दो मंजिला मकान नदी में समा गया। इसी दिन सचिदानंद मंडल, उनके तीन भाइयों (उदय, नीरज और पुतुल मंडल) तथा बालमुकुंद मंडल के घरों सहित कुल पांच घर नदी में विलीन हो गए, जिससे पचीस लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) अलंकृता पांडे, नौगछिया एसपी वैभव शर्मा, एसडीपीओ संयम रजा, डीसीएलआर शैलेंद्र सिंह, कार्यपालक दंडाधिकारी सुधीर कुमार और खरीक सीओ प्रवीण वत्स ने शनिवार, 10 अक्टूबर को मौके का मुआयना किया। अधिकारियों के अनुसार लगभग चालीस से पचास घर प्रभावित हुए हैं, चार पक्के मकान पूरी तरह से तबाह हो गए हैं और दस अन्य मकानों में दरारें आ गईं जिन्हें खाली करा लिया गया। इंजीनियरों का एक तीन मंजिला भवन जो बाढ़रोधी कार्यों की निगरानी के काम आता था, वह भी ढह गया लेकिन उसमें तैनात कर्मी बाल-बाल बच गए। इसके अलावा, एक 125 साल पुराना तटबंध टूट गया है जिससे हजारों लोगों के लिए जरूरी यातायात मार्ग नंबर 14 सड़क पर खतरा मंडरा रहा है।
ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल और सड़क निर्माण मंत्री इंजीनियर कुमार शैलेंद्र स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। जल संसाधन विभाग कटाव को रोकने के लिए एनसी बैग का इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि पिछले बारह घंटों में गंगा का जलस्तर बारह सेंटीमीटर कम हुआ है और यह चेतावनी के निशान से नीचे है, लेकिन नदी की धारा बाएं तटबंध की ओर मुड़ गई है जिससे तबाही जारी है। स्थानीय लोगों का मानना है कि दो हजार एक में बने विक्रमशिला सेतु की वजह से नदी की धारा बदल गई है। स्थानीय प्रशासन ने पैंसठ पीड़ित परिवारों को प्लास्टिक शीट दी है और इस्माइलपुर गोदाम में उनके खाने व रहने की व्यवस्था की जा रही है। स्थानीय निवासी और पूर्व जिला परिषद सदस्य प्रेमशिला देवी ने तुरंत राहत, उचित मुआवजा और पक्के पुनर्वास की मांग की है।