भागलपुर में गंगा का जलस्तर स्थिर, कटाव से फसल और बुनियादी ढांचा खतरे में

MyBhagalpur Team28 August 20262 min read17 viewsCity Local
भागलपुर में गंगा का जलस्तर स्थिर, कटाव से फसल और बुनियादी ढांचा खतरे में

भागलपुर में 28 अगस्त 2026 तक पिछले 24 घंटों में गंगा नदी का जलस्तर स्थिर बना हुआ है, हालांकि नदी खतरे के निशान से 16 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। स्थिरता के बावजूद, निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है।

कहां कितना है जलस्तर

सुल्तानगंज और कहलगांव में नदी खतरे के स्तर से ऊपर बह रही है, विशेष रूप से कहलगांव में 27 अगस्त को जलस्तर 31.09 मीटर के खतरे के निशान से अधिक 31.91 मीटर दर्ज किया गया था। सुल्तानगंज प्रखंड की महशी, गंगनिया और तिलकपुर पंचायतों में पानी घुसने की नई खबर है, जिससे सैकड़ों एकड़ मकई की फसल नष्ट हो गई है। सबौर प्रखंड में शंकरपुर और अन्य ग्रामीण इलाकों में भी भारी कृषि क्षति हुई है। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय परिसर, प्रोफेसर कॉलोनी और महिला हॉस्टल में भी बाढ़ का पानी घुस गया है।

कटाव और प्रशासनिक तैयारी

राघोपुर जमींदारी बांध पर कटाव एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। 27 अगस्त को कटाव के कारण राघोपुर-काजीकुरिया बांध का 150 मीटर हिस्सा बह गया, जिससे राघोपुर डूब गया और ऊर्जा मंत्री बुलु मंडल का आवास भी प्रभावित हुआ। ब्रिटिश काल से गंगा के तट पर सबसे ऊंचे स्थान के रूप में पहचाना जाने वाला हाई-लेवल रेलवे स्टेशन अब खतरे में है। जिला magistrate अलंकृता पांडे ने मरम्मत के कार्यों की निगरानी के लिए राघोपुर का दौरा किया है और संकट से निपटने के लिए संबंधित अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। आपदा प्रबंधन विभाग का काम तेज कर दिया गया है और जल संसाधन विभाग के कार्यकारी अभियंता आदित्य प्रकाश ने बताया कि नेपाल संकट के बाद गंडक में 50,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, लेकिन गंगा के मौजूदा स्थिर रहने से भागलपुर में जलस्तर 2 से 3 सेंटीमीटर से ज्यादा नहीं बढ़ेगा।

सुरक्षा उपाय और ट्रैफिक अपडेट

सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय प्रशासन लाउडस्पीकर से लोगों को सतर्क कर रहा है और नदी किनारे की झोपड़ियों को हटाया जा रहा है। सरकारी संचालित नावों के लिए नए नियम बनाए गए हैं, जिनके तहत उन पर लाल झंडा लगाना, मुफ्त परिवहन देना और पारदर्शिता के लिए लॉगबुक रखना अनिवार्य किया गया है। लगातार आ रही बाढ़ से क्षेत्रीय सिल्क उद्योग भी प्रभावित हुआ है। निवासियों को राहत देने के लिए अधिकारियों ने 28 अगस्त को विक्रमशिला सेतु पर यातायात स्थगित करने के फैसले को टाल दिया है; यातायात प्रतिबंधों की नई तारीख की घोषणा बाद में की जाएगी।

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