रविवार 30 अगस्त 2026 की सुबह भागलपुर के सबौर ब्लॉक की फरका पंचायत स्थित अंग्रेजी गांव में गंगा नदी के कटाव से भारी तबाही हुई। तड़के 2:00 बजे से 3:00 बजे के बीच गंगा का जलस्तर घटने से नदी का किनारा अचानक ढह गया, जिससे लगभग 10 से 16 घर नदी में समा गए। इस घटना में इतवारी साह का दो मंजिला पक्का मकान भी पूरी तरह नष्ट हो गया। ग्रामीणों ने बताया कि कई घर अपने अंदर पूरा सामान लिए हुए नदी में समा गए, जिससे परिवार अपनी जीवन भर की जमापूंजी, अनाज, कपड़े, आभूषण और जरूरी कागजात नहीं बचा पाए।
सबौर की अंचलाधिकारी (सीओ) दिव्या कुमारी और पुलिस बल मौके पर पहुंचे और राहत कार्यों का जायजा लिया। बाढ़ नियंत्रण विभाग ने और अधिक कटाव रोकने के लिए ईसी बैग यानी बालू भरी जियो-बैग डालने शुरू कर दिए हैं। हालांकि, ग्रामीण अभी भी दहशत में हैं कि उनकी पूरी बस्ती नदी में बह सकती है। पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं और उन्होंने तुरंत पॉलीथिन शीट, सूखा राशन और साफ पीने के पानी जैसी आपातकालीन मदद की मांग की है।
ग्रामीणों ने मौजूदा बचाव कार्यों की आलोचना करते हुए कहा है कि जियो-बैग तेज बहाव को रोकने के लिए नाकाफी हैं। वे निकासी के लिए पर्याप्त नावें भेजने और स्थायी रिंग बांध या बड़े पैमाने पर युद्धस्तर पर कटाव रोधी उपाय करने की मांग कर रहे हैं। हालांकि पानी का घटना इस तबाही का तात्कालिक कारण है, लेकिन कुछ जानकारों का मानना है कि तीन दशक पहले विक्रमशिला सेतु के निर्माण से जुड़ी नदी के बहाव में बदलाव के कारण यह लगातार तबाही हो रही है। यह घटना इस इलाके की हालिया आपदाओं के बाद हुई है। इससे पहले 29 अगस्त 2026 को भीषण कटाव से राघोपुर-नरकटिया बांध का करीब 300 मीटर हिस्सा बह गया था। इसके अलावा 26 अगस्त 2026 को गंगा में कटाव रोधी काम में लगे 22 मजदूरों को ले जा रही एक नाव पलट गई थी, जिसमें 21 मजदूरों को बचा लिया गया लेकिन एक अभी भी लापता है।