भागलपुर के सबौर ब्लॉक के इंग्लिश बस्ती में गंगा नदी की बाढ़ और भीषण कटाव ने भारी तबाही मचाई है। इस घटना में प्रियम कुमार का पक्का मकान नदी में समा गया, जिससे उनका परिवार बेघर हो गया है। यह दर्दनाक घटना रात के करीब 2:00 बजे से 2:30 बजे के बीच हुई, जब पूरा परिवार सो रहा था।
इस खबर के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- रात में सोते समय हुआ हादसा, परिवार ने किसी तरह बचाए मवेशी।
- फ्रिज, वॉशिंग मशीन और बाइक सहित चार से पांच लाख रुपये का सामान नष्ट।
- प्रियम की शादी को हुए थे सिर्फ दो महीने, पत्नी रक्षाबंधन पर थीं मायके।
- छह से आठ लोगों का परिवार अब पंचायत भवन में रहने को मजबूर।
प्रियम की मां संझी देवी की नींद रात में अचानक एक तेज आवाज से खुली। उन्हें पहले लगा कि घर में कोई चोर या घुसपैठिया आया है। लेकिन बाहर देखने पर पता चला कि उनके पक्के मकान का एक हिस्सा गंभीर कटाव के कारण पहले ही नदी में गिर चुका था। परिवार ने तुरंत अपने मवेशियों को वहां से सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन वे घर का कोई भी सामान नहीं बचा सके।
इस तबाही में फ्रिज, गोदरेज की अलमारी, वॉशिंग मशीन, दूध बांटने वाली बाइक, कपड़े और अन्य जरूरी घरेलू सामान पूरी तरह नष्ट हो गए। इन सभी चीजों की कुल कीमत चार से पांच लाख रुपये के बीच है। हादसे में केवल एक साइकिल बच पाई क्योंकि वह घर के बाहर खड़ी थी। प्रियम की शादी को अभी सिर्फ दो महीने ही हुए थे और उनकी पत्नी सौभाग्य से 28 अगस्त 2024 को रक्षाबंधन पर अपने मायके गई हुई थीं।
वर्तमान में छह से आठ लोगों का यह परिवार गांव के पंचायत भवन में रह रहा है, जिसकी व्यवस्था गांव के मुखिया ने की है। परिवार का कहना है कि उन्हें केवल कभी-कभार मिलने वाले खाने के पैकेट के रूप में थोड़ी सी मदद मिल रही है। वे कपड़ों जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी काफी संघर्ष कर रहे हैं। अब यह परिवार अपनी एकमात्र बची हुई गाय के दूध को बेचकर अपना गुजारा कर रहा है। संझी देवी ने बताया कि नदी के कटाव से गांव के कम से कम 10 से 12 अन्य घर भी नदी में समा चुके हैं।
प्रियम और उनका परिवार अब सरकार से मदद की गुहार लगा रहा है। वे अपनी जिंदगी को फिर से पटरी पर लाने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक घर की मांग कर रहे हैं। हालांकि गंगा का जलस्तर थोड़ा कम हो गया है, लेकिन अभी भी कटाव का खतरा बना हुआ है, जिससे विस्थापित परिवारों की मुश्किलें लगातार बनी हुई हैं।