HRMS घोटाले के बाद शिक्षा विभाग का बड़ा आदेश, अब 100 प्रतिशत डेटा जांच होगी अनिवार्य

HRMS में फर्जी शिक्षक का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने सैलरी पेमेंट के नियमों को और सख्त कर दिया है। भागलपुर प्रमंडल के क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक (RDDE) सुभाष कुमार गुप्ता ने भागलपुर और बांका जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कार्यालयों के टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ की सैलरी और भत्तों की समीक्षा के बाद कड़े निर्देश जारी किए हैं।
- HRMS घोटाले के खुलासे के बाद सैलरी प्रक्रिया सख्त हुई।
- भागलपुर और बांका जिले के लिए जारी हुए नए निर्देश।
- 22 अक्टूबर तक सभी शिक्षकों और स्टाफ का डेटा सत्यापित करना होगा।
डेटा सत्यापन अनिवार्य
RDDE गुप्ता ने आदेश दिया है कि CFMS या HRMS के जरिए सैलरी जारी होने से पहले सभी डेटा का 100 प्रतिशत सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। जिला शिक्षा अधिकारियों को 22 अक्टूबर तक सभी शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए यह पूरा डेटा वेरिफिकेशन पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
विशेष टीम का गठन और जांच
इसे आसान बनाने के लिए जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) के नेतृत्व में कर्मियों की एक विशेष टीम बनाई जाएगी। इस टीम को HRMS पर दर्ज सभी एंट्री की पूरी जांच करने का काम सौंपा गया है। यह समीक्षा पूरी होने के बाद ही सैलरी भेजी जाएगी।
प्रमाण पत्र जमा करना होगा
जांच के बाद, संबंधित DEO को विभाग को एक प्रमाण पत्र देना होगा, जिसमें यह पुष्टि करनी होगी कि सभी शिक्षकों और कर्मचारियों की सैलरी नियमों के अनुसार है और डेटा में कोई गड़बड़ी नहीं है।