जानिये कैसे जनप्रिय भागलपुर ने बाढ़ पीड़ितों के साथ मिलकर नदी को बचाने की उठाई आवाज

MyBhagalpur Team27 September 20262 min read5 viewsCity Local
जानिये कैसे जनप्रिय भागलपुर ने बाढ़ पीड़ितों के साथ मिलकर नदी को बचाने की उठाई आवाज

विश्व नदी दिवस के अवसर पर सामाजिक-संस्कृतिक संस्था जनप्रिय भागलपुर की ओर से “नदी को अविरल बहने दो” विषय पर रविवार को एक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय बाल निकेतन में ठहरे नदी किनारे रहने वाले बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच आयोजित किया गया, जिसमें नदियों के संरक्षण और बाढ़ की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने की।
संचालन गौतम कुमार ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन संस्था के संरक्षक उज्ज्वल घोष ने किया।

नदियों का प्राकृतिक प्रवाह और बाढ़ की समस्या


इस अवसर पर मुख्य वक्ता जयंत जलद ने कहा कि नदियाँ केवल जलधारा नहीं, बल्कि हमारे जीवन, आजीविका, संस्कृति और पर्यावरण का आधार हैं। नदियों के प्राकृतिक प्रवाह में लगातार हो रहे हस्तक्षेप का सबसे अधिक असर नदी किनारे रहने वाले गरीब और वंचित समुदायों पर पड़ता है। बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान नदी के प्राकृतिक प्रवाह, जलग्रहण क्षेत्र और नदी के किनारों के संरक्षण से ही संभव है।

नदी और मनुष्य का संबंध


संस्था के अध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि नदी और मनुष्य का संबंध सदियों पुराना है। नदियों के साथ छेड़छाड़ और उनके प्राकृतिक प्रवाह को रोकने की कोशिशों का परिणाम बाढ़, जलजमाव और पर्यावरणीय संकट के रूप में सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि नदी संरक्षण को केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखने की जरूरत है।

बाढ़ प्रभावित लोगों की पीड़ा


कार्यक्रम का संचालन करते हुए गौतम कुमार ने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों की पीड़ा को समझे बिना नदी और बाढ़ पर कोई भी नीति अधूरी है। नदी किनारे रहने वाले लोगों के अनुभव और सुझावों को विकास योजनाओं में शामिल किया जाना चाहिए। राहत कार्यों के साथ-साथ ऐसी दीर्घकालिक नीति जरूरी है, जिससे लोगों की आजीविका भी सुरक्षित रहे और नदी का प्राकृतिक प्रवाह भी बना रहे।

नदियों को बचाना आने वाली पीढ़ियों का भविष्य


वहीं, सागर महतो और सुदर्शन महतो ने कहा कि नदियों को बचाना आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को बचाना है। नदी को अतिक्रमण, प्रदूषण और अनियोजित हस्तक्षेप से मुक्त किए बिना स्वस्थ पर्यावरण की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से नदी संरक्षण के अभियान को जनभागीदारी से आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

इस संवाद कार्यक्रम में उपस्थित बाढ़ प्रभावित लोगों ने भी अपनी समस्याओं को रखा और नदियों को अविरल, निर्मल और प्राकृतिक स्वरूप में बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से सीताराम तांती, कपिलदेव महतो, निर्मला देवी, कैलाश महतो, संतोष कुमार, राधा देवी, मधु महतो, शत्रुघन कुमार, रामशरण मंडल, रवि कुमार, दिनेश महतो सहित भारी संख्या में बाढ़ पीड़ित और गणमान्य लोग उपस्थित थे।

MyBhagalpur की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel
Share:

Comments

Leave a comment