झाझा का प्रसिद्ध नवरात्रि मेला: 1958 में 5 हजार, अब 15 लाख का बजट; जानें क्या बदला

झाझा में आयोजित होने वाले नवरात्रि मेले का बजट समय के साथ काफी बदल गया है। पुराने रिकॉर्ड्स के अनुसार, 1958 में इस मेले का आयोजन 5,000 रुपये से कम में हो गया था, जबकि आज इस खर्च में भारी बढ़ोतरी हुई है।
- 1958 में मेले का खर्च 5,000 रुपये से कम था।
- उस समय मंदिर का निर्माण खर्च लगभग 11,000 रुपये था।
- इस साल मेले का अनुमानित खर्च 15 लाख रुपये से अधिक होने की संभावना है।
- महंगाई के कारण बजट में यह वृद्धि हुई है।
- मंदिर की स्थापना करने वाले मूल धार्मिक गुरुओं के वंशज अब इस मेले का प्रबंधन कर रहे हैं।
खर्च में भारी बढ़ोतरी
मंदिर समिति के अधिकारी प्रफुल्ल चंद्र त्रिवेदी ने ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स के आधार पर बताया कि 1958 में पूरा नवरात्रि मेला 5,000 रुपये से कम में आयोजित किया गया था। साथ ही, उस समय मंदिर के निर्माण की लागत भी लगभग 11,000 रुपये थी।
वर्तमान बजट और महंगाई
समिति के महासचिव Mr. बैंकन ने बताया कि इस साल के मेले का खर्च 15 लाख रुपये से अधिक होने का अनुमान है। समिति के सदस्यों ने स्पष्ट किया कि बढ़ती महंगाई ने मेले से जुड़े सभी खर्चों के लिए बजट बढ़ाने की आवश्यकता को जन्म दिया है।
पारिवारिक विरासत
समिति ने यह भी बताया कि एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पहलू यह है कि जिन मूल धार्मिक गुरुओं ने शुरुआती वर्षों में मंदिर और मेले की स्थापना की थी, उनके वंशज ही अब इस आयोजन का प्रबंधन कर रहे हैं। दूसरी और तीसरी पीढ़ी के सदस्य इसे अपनी पूर्वजों की विरासत के रूप में देख रहे हैं।