भागलपुर के कहलगांव में एनएच-80 निर्माण कार्य के तहत नाले के निर्माण में गंभीर लापरवाही और मानकों की अनदेखी के आरोप लगे हैं। इस मामले में सर्वदलीय समिति ने जिला पदाधिकारी को लिखित शिकायत पत्र सौंपकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
- भागलपुर में जीरो माइल से मिर्जाचौकी तक चल रहा है एनएच-80 निर्माण कार्य।
- कहलगांव में कुलकुलिया मोड़ से बस स्टैंड और एमआरएफ शोरूम के समीप बन रहा है नाला।
- सर्वदलीय समिति ने डीएम को सौंपी है लिखित शिकायत।
- निर्माण कार्य की तकनीकी स्तर पर उच्च स्तरीय जांच कराने की उठी है मांग।
भागलपुर, 26 सितंबर। जिले के जीरो माइल से कहलगांव होते हुए मिर्जाचौकी तक चल रहे एनएच-80 निर्माण कार्य के तहत कहलगांव में कुलकुलिया मोड़ से बस स्टैंड और एमआरएफ शोरूम के समीप बनाए जा रहे नाले की गुणवत्ता और निर्माण मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर लापरवाही बरतने के आरोप लगाए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए सर्वदलीय समिति, कहलगांव ने जिला पदाधिकारी को एक लिखित शिकायत पत्र सौंपा है। समिति ने इस निर्माण कार्य की गुणवत्ता की तकनीकी स्तर पर उच्च स्तरीय जांच कराने और तुरंत आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। डीएम को सौंपी गई शिकायत में बताया गया है कि
नाले के मुख्य ढांचे के निर्माण में 10 एमएम के सरिया को एक-दूसरे से करीब 10 से 12 इंच की दूरी पर लगाया जा रहा है। वहीं, इसके ऊपरी हिस्से (टॉप) में 8 एमएम के सरिया का इस्तेमाल किया जा रहा है और उसकी दूरी भी करीब 10 से 12 इंच रखी गई है। समिति का तकनीकी दावा है कि ऐसे भारी जलप्रवाह और लोड वाले नाले में 10 एमएम के मुख्य सरिया और बाइंडिंग सरिया, दोनों को ही लगभग 5 से 6 इंच की बेहद कम दूरी पर लगाया जाना अनिवार्य है, ताकि ढांचा मजबूत रहे।
शिकायत में नाले की दीवार की मोटाई में एकरूपता न होने पर भी कड़ी आपत्ति जताई गई है। आरोप है कि
नाले की दीवार नीचे की तरफ मात्र तीन इंच और ऊपर आते-आते करीब छह इंच ही ढाली जा रही है। इसके अतिरिक्त, नाले के ऊपर बनाए जा रहे स्लैब (कवर) को लेकर भी नियमों की अनदेखी की बात सामने आई है। वर्तमान में स्लैब में 10 एमएम और 8 एमएम के सरिया का इस्तेमाल 10 से 12 इंच की दूरी पर किया जा रहा है, और स्लैब की कुल मोटाई केवल चार से पांच इंच रखी जा रही है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, मानकों के तहत इस ढक्कन में सिंगल लेयर 12 एमएम का सरिया 5 इंच की दूरी पर होना चाहिए, जिसके ऊपर 8 एमएम का बाइंडिंग सरिया 6 इंच की दूरी पर लगे। साथ ही, वाहनों का भार सहने के लिए ढक्कन की मोटाई कम से कम आठ इंच होनी चाहिए।
निर्माण में इस्तेमाल हो रहे कंक्रीट के अनुपात को लेकर भी शिकायतकर्ता आश्वस्त नहीं हैं। नियमों के मुताबिक, इस स्तर के सार्वजनिक निर्माण में
कंक्रीट का मिश्रण 1:1.5:3 के अनुपात में होना चाहिए—यानी एक भाग सीमेंट, डेढ़ भाग बालू और तीन भाग गिट्टी। आरोप है कि मौके पर इस मानक का पालन नहीं किया जा रहा है। सर्वदलीय समिति ने संबंधित विभाग के तकनीकी अधिकारियों और अभियंताओं से तुरंत निर्माण स्थल का भौतिक निरीक्षण करने का आग्रह किया है। उन्होंने मांग की है कि स्वीकृत नक्शे, टेक्निकल एस्टीमेट और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के साथ मौके पर हो रहे कार्य का मिलान किया जाए। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक किसी स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी या विभाग द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। विभागीय अधिकारियों द्वारा जांच और तकनीकी विनिर्देशों की रिपोर्ट आने के बाद ही यह पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण में नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।