अद्भुत नजारा! 150 किलो के कांवड़ पर 'रावण' को बिठाकर निकले भक्त

MyBhagalpur Team21 August 20262 min read58 viewsCity Local
अद्भुत नजारा! 150 किलो के कांवड़ पर 'रावण' को बिठाकर निकले भक्त

भागलपुर, 21 अगस्त (हि.स.)। सावन के पावन महीने में सुल्तानगंज से देवघर जाने वाले 105 किलोमीटर लंबे कच्चे कांवड़िया पथ पर आस्था के कई अनोखे रंग देखने को मिल रहे हैं। कोई भगवान शिव को कांवड़ में बिठाकर ले जा रहा है, तो कोई खुद बाबा को अपने कंधों पर उठाए बढ़ रहा है।

  • पश्चिम बंगाल से आए शिवभक्तों का अनोखा जत्था आकर्षण का केंद्र
  • महादेव के भक्त रावण की विशाल प्रतिमा को कांवड़ पर विराजमान कर निकले
  • पूरी कांवड़ का वजन 150 किलोग्राम से भी अधिक है

पश्चिम बंगाल से आया शिवभक्तों का जत्था

इसी बीच, पश्चिम बंगाल से आए शिवभक्तों का एक अनोखा जत्था इस समय हर किसी के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यह जत्था महादेव के सबसे बड़े भक्त, प्रकांड विद्वान और ज्ञानी 'रावण' की विशाल प्रतिमा को कांवड़ पर विराजमान कर पैदल यात्रा पर निकला है। इस कांवड़ की सबसे खास बात इसका भारी-भरकम वजन है। रावण की प्रतिमा के साथ इस पूरी कांवड़ का वजन 150 किलोग्राम से भी अधिक है। इतने भारी वजन को उठाकर पथरीले और रेतीले रास्तों पर पैदल चलना बेहद मुश्किल काम है, लेकिन इन श्रद्धालुओं के गजब के उत्साह के आगे यह वजन बौना साबित हो रहा है।

रावण को बाबा बैद्यनाथ से मिलाने की यात्रा

पश्चिम बंगाल से आए इन श्रद्धालुओं का कहना है कि रावण भले ही राक्षस राज था, लेकिन वह महादेव का सबसे अनन्य और परम भक्त था। वे रावण को उसके आराध्य बाबा बैद्यनाथ से मिलाने के लिए अजगैबीनाथ धाम से जल भरकर बाबाधाम लेकर जा रहे हैं। श्रद्धालुओं ने दृढ़ विश्वास के साथ कहा, कांवड़ का वजन जरूर ज्यादा है, लेकिन जब भोलेनाथ का आशीर्वाद साथ हो तो कोई थकावट या परेशानी महसूस नहीं होती। महादेव की भक्ति में उठाया गया हमारा हर कदम हमें बाबा धाम तक जरूर पहुंचाएगा। भारी वजन के बावजूद 'बम-बम भोले' और 'हर-हर महादेव' के जयकारों के साथ यह जत्था लगातार आगे बढ़ रहा है, जिसे देखने के लिए रास्ते में लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है।

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